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Showing posts from May, 2011

रिश्वत

हर न्यूज़ चैनल पर अन्ना हजारे के अनशन की खबर थी. पूरा देश आंदोलित हो उठा था नेहा ने घडी पर नज़र डाली .११ बज गए विवेक अभी तक नहीं लौटे .बच्चे खाना खा कर सो गए .नेहा ने टी. वी बंद कर दिया और अखबार खोल कर बैठ गयी .अखबार में भी वही खबरें .एक बुजुर्ग का यूं आवाज़ उठाना ..वह अभिभूत हो उठी .सच है आवाज़ तो उठानी ही होगी .
नेहा के मन में कुछ कुलबुला गया .आज विवेक से बात करूंगी .ये रोज़ रोज़ ऑफिस के बाद यार -दोस्तों के साथ बैठना ,खाना -पीना और देर से घर आना,बच्चों से तो मिलना ही नहीं होता.घर के लिए भी तो उनकी जवाबदारियाँ है .
विवेक के आने पर वह चुप ही थी ,पर मन में विचार उबल रहे थे .उसकी चुप्पी को भांपते ,बिस्तर पर बैठते विवेक ने उसके हाथ पर दस हजार रुपये रखे और कहा -तुम बहुत दिनों से शोपिंग पर जाने का कह रही थीं न.ऐसा करो कल सन्डे है तुम बच्चों को लेकर चली जाओ ,में छोड़ दूंगा मॉल में .तुम कहो तो में भी चलूँ ,पर तुम्हे पता है में बोर हो जाता हूँ.२-३ घंटे सो लूँगा में तब तक. और हाँ अपने लिए दो -तीन बढ़िया साड़ियाँ ले लेना .पैसों की चिंता मत करना और लगे तो में दे दूंगा .
और नेहा बिना क…

रांग नंबर

अभी कुछ दिनों पहले जो हुआ सो आपसे शेयर करती हूँ . एक फ़ोन आया मोबाइल पर नम्बर नया था.फ़ोन उठाया हेल्लो..
आप कौन?कहाँ से बोल रहे है?वहां से आवाज़ आयी.
आपने कहाँ लगाया है?किस्से बात करनी है?
आपसे बात करनी है ?
में कौन?मेरा नाम बताइए यदि मुझसे बात करना है तो.
आप ही बता दीजिये.
अरे जब आपको बात करना है तो आपको मालूम होगा न.
हमें तो आपसे बात करना है.
आप कौन बोल रहे है?
राज .
कौन राज ?आपको ये नम्बर कहाँ से मिला?में आपको नहीं जानती.
आपने ही दिया है ये नंबर तो.
मैंने तो नहीं दिया.
फिर हमारे पास कैसे आया?
अरे मुझे क्या पता कैसे आया? वैसे मेरे पास फ़ोन बहुत कम ही आते है और रोंग नंबर तो बिलकुल ही नहीं. इसलिए थोडा मजा भी आ रहा था बात करने में. (वैसे भी छुट्टियों में थोडा बोर हो रही थी.) आपने ही दिया है . नहीं मैंने नहीं दिया. आपको बात किससे करनी है? आपसे. अब बाते दुहराने लगी तो मैंने फोन नीचे रख दिया. सोचा थोड़ी देर में खुद ही रख देगा जो भी है.फ़ोन बंद हो गया. एक मिनिट बाद फिर घंटी बजी वही नंबर. फ़ोन काट दिया मैंने. घंटी बार बार बजती रही तो सोचा क्यों न फ़ोन उठा ही लूं. जब पैसे लगेगे तो खुद…

इंतजार ११

मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ ?मधु से मिलकर उसे सारी बात बताने के बाद भी वह शांत थी ...उसके बाद वह फिर नहीं मिली मुझसे .आज मंदिर में मुलाकात हुई क्या ये मुलाकात आगे भी जारी रहेंगी ...३३ सालों बाद इन मुलाकातों का क्या स्वरुप होगा .. मधु से फिर मुलाकात हुई और आगे भी होती रही फिर....)अब आगे..जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी .हफ्ते में कई शामें सबके साथ बीतती .मधु से अकेले मिलने का समय तो नहीं मिलता ,लेकिन उसका सानिध्य अच्छा लगता था .पर रात में भयावह सन्नाटा. उम्र और अकेलेपन की थकान मुझ पर हावी होती जा रही थी. मेरे रिटायर्मेंट को दो महीने बचे थे .बेटे के फ़ोन आ रहे थे पापा आप अमेरिका आ जाइये .भैया भाभी भी अकेले थे भैया चाहते थे में शाहपुर आ जाऊ और हम साथ ही रहे. में मधु को छोड़कर जाना नहीं चाहता था,हालाँकि हम साथ हो कर भी उतने ही दूर थे जितने नदी के दो किनारे.
पुष्पा और माला बाहर गयीं थी आरती भी…

इंतजार १०

( मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ ?मधु से मिलकर उसे सारी बात बताने के बाद भी वह शांत थी ...उसके बाद वह फिर नहीं मिली मुझसे .आज मंदिर में मुलाकात हुई क्या ये मुलाकात आगे भी जारी रहेंगी ...३३ सालों बाद इन मुलाकातों का क्या स्वरुप होगा .. मधु से फिर मुलाकात हुई और आगे भी होती रही फिर....)अब आगे.. सुबह छः बजे मोबाईल बजा .पुष्पा का फ़ोन था,मधुसुदन जी मधु की मम्मी की तबियत अचानक ख़राब हो गयी है .हम उन्हें लेकर अस्पताल में है .
मैंने अस्पताल का नाम पता पूछा और तुरंत वहां पहुंचा. देखा चारों सहेलियां वहीँ थीं .
क्या हुआ?
सुबह ४ बजे उन्हें अस्थमा का अटेक आया. अभी आई सी यु में हैं आरती ने बताया .
तभी डॉक्टर ने बताया की उनकी हालत स्थिर है दो घंटे बाद वार्ड में शिफ्ट कर सकते हैं .
सबने राहत की सांस ली.
मधु ने पुष्पा और माला को कहा की अब तुम घर जाओ तुम्हे स्कूल जाना है आरती और मधुसुदन हैं यहाँ .
दोनों ने विरोध किया तो …

इंतजार . ९

( मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ ?मधु से मिलकर उसे सारी बात बताने के बाद भी वह शांत थी ...उसके बाद वह फिर नहीं मिली मुझसे .आज मंदिर में मुलाकात हुई क्या ये मुलाकात आगे भी जारी रहेंगी ...३३ सालों बाद इन मुलाकातों का क्या स्वरुप होगा ...)अब आगे...

दो महीने बाद सुधा से मेरी शादी हो गयी और छ महीने बाद बेहतर नौकरी मिलने पर में दिल्ली चला गया. करीब साल भर बाद जब वापस आया तो पता चला मधु की बहिन की शादी हो गयी और वह अपनी मम्मी के साथ किसी ओर शहर में चली गयी है .
इसके बाद से आज मधु से मुलाकात हुई .
में मधु से फिर मिलने को बेताब था लेकिन फ़ोन लगाने का साहस नहीं हुआ. अतीत के आईने में खुद का जो रूप मैंने देखा था उसने मेरी छवि मेरे ही मन मानस में कमजोर कर दी थी .
एक शाम माल में कुछ खरीदने जाना हुआ तभी पीछे से हंसी की आवाज़ सुनाई दी ,जिसमे एक आवाज़ काफी स्पष्ट और पहचानी हुई थी पलट कर देखा चार महिलाएं खड़ी हंस रही…

इंतजार ८

( मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ )अब आगे...

भाभी ने बताया सुधा बहुत अच्छी लड़की है .इंटर तक पढ़ी है और हर काम में होशियार है उनके दूर के रिश्ते के मामा की बेटी है .उसके पिताजी सरकारी नौकरी में ऊँचे ओहदे पर है .
उसके साथ सुख से रहोगे भैया .चाय का कप लेकर जाते हुए भाभी रुक गयीं ओर कहा भैया एक बात और अभी वो लोग इसी शहर में है इसलिए अभी ४-५ दिन आप उस लड़की से न मिलना .किसी ने देख लिया तो बनी बात बिगड़ जाएगी .
और चार पांच दिन? में कसमसा गया पर कहता किस्से वहां समझने वाला कोई था ही नहीं .
अगले ४-५ दिन शाम पांच बजे भैया मुझे लेने ऑफिस आ जाते कभी किसी रिश्तेदार के यहाँ जाने या फिर बाज़ार जाने के बहाने .बिना मुझसे कुछ कहे जिस तरह मुझे घेरा जा रहा था मुझे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. कुछ कहूँ तो किससे और क्या? आखिर किसी ने मुझे तो कुछ कहा ही नहीं .सब कुछ बहुत सामान्य तरीके से हो रहा था.
मधु से मिले करीब बारह दिन हो गए थे मैंने उसे चिठ्ठी …

इंतजार ....७

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया .पता नहीं कैसे पर घर में मधु के बारे में पता चल गया घर पहुंचते ही माँ पिताजी और दादी के सवालात शुरू हो गए.जब मधु के बारे में बताया तो घर में बवाल मच गया. माँ ने अनशन की धमकी दे दी. उस दिन मधु से नहीं मिला जब घर पहुंचा माँ को अस्पताल ले जाते देखा.अनशन से माँ की हालत ख़राब हो गयी थी.उन्हें वचन दिया की कोई ऐसा कम नहीं करूंगा जिससे कुसुम की शादी में कोई रूकावट आये .फिर ऑफिस के काम से दिल्ली चला गया.जब लौट कर आया...)अब आगे
घर आ कर एक सिगरेट सुलगाई और बाहर बालकनी में आ गया.
दिल्ली में चार -पांच दिन रहा पर कुछ भी तो नहीं सोच सका .न ही किसी निर्णय पर पहुँच सका .मधु से मिलूंगा तो क्या कहूँगा कैसे सब बताऊंगा इस बारे में सोचने से बचता रहा

वापस घर पहुंचा तो किन्ही मेहमानों को बैठक में पिताजी के साथ बैठे देखा. मुझे देख कर पिताजी ने …

इंतजार ६

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया .पता नहीं कैसे पर घर में मधु के बारे में पता चल गया घर पहुंचते ही माँ पिताजी और दादी के सवालात शुरू हो गए.जब मधु के बारे में बताया तो घर में बवाल मच गया. माँ ने अनशन की धमकी दे दी. उस दिन मधु से नहीं मिला जब घर पहुंचा ..)अब आगे
पूरी शाम में आफिस में फाइलों में सर घुसाए बैठा रहा .रात करीब आठ बजे घर पहुंचा घर के सामने रिक्शा खड़ा था .कई सारे पास पडोसी जमा थे .तभी भैया माँ को गोद में उठाये बाहर आये और उन्हें रिक्शे में बैठा दिया .दूसरी तरफ से भाभी ने आकर माँ को संभाला और उनके साथ रिक्शे में बैठ गयी. क्या हुआ माँ को ?दरवाजे पर छुटकी दिखाई दी ,मुझे देखते ही बिलखने लगी -भैया माँ .
कुछ समझने का समय नहीं था मैंने साईकिल उठाई और रिक्शे के पीछे हो लिया.

माँ वैसे ही दो दिन की उपवासी थी उस पर तीसरे दिन का उनका अनशन .में गलियारे में हतप्रभ खड़ा था…

इंतजार ५

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया .पता नहीं कैसे पर घर में मधु के बारे में पता चल गया घर पहुंचते ही मान पिताजी और दादी के सवालात शुरू हो गए. )अब आगे.
मधु नाम है उसका .मेरे साथ कॉलेज में पढती थी तीन साल पीछे थी वही हमारी जान -पहचान हुई. पिताजी नहीं है उसके .मम्मी और एक बड़ी बहन है .पिताजी की पेंशन से घर चलता है बस .
हे भगवान ,तेरी मति को क्या हो गया है रे मधुसुदन ,बिना बाप भाई की लड़की कौन जात है ?
बहुत बड़ा मुद्दा था ये में चुप लगा गया .
लेकिन दादी वह बहुत अच्छी है, सुंदर है, समझदार है पढ़ने में बहुत होशियार है.
अरे तो कौन सी नौकरी करवानी है हमें तेरी बहु से?घर में न बाप न भाई फिर परजात. बारात द्वारे खड़ी होगी तो घोड़ी से उतर कर तू अगुआई करेगा ? हमारे रिश्ते-नातेदार क्या कहेंगे ?और अपनी बहिन की तो सोच तू.परजात लड़की ले आएगा तो उसके लिए रिश्ते कहाँ से लायेंगे कौन ब्याहेग…

इंतजार ४

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया )अब आगे
घर में घुसते ही लगा आज माहौल में घुटन सी है .छोटी बहन मुझे देखते ही अंदर चली गयी . माँ चौके के दरवाजे पर खड़ी थी ,उसकी सूजी आँखे बता रही थी वह खूब रो चुकी है .दादी अपनी जप माला लिए मुझे ही देख रही थी भाभी भैया वहां नहीं थे भैया शायद आये नहीं थे और भाभी या तो कमरे में थी या चौके में . पिताजी का सदा का साथी अख़बार जमीन पर ओंधे मुंह पड़ा था . मैंने दिमाग पर जोर दिया की क्या बात हो सकती है ?तभी पिताजी गरजे -लो आ गए साहब बहादुर अब इन्ही से पूछो सच बात.
में सिटपिटा गया -माँ क्या हुआ?
माँ ने जोर जोर से रोना शुरू कर दिया .आँचल से मुंह ढके खड़े खड़े उनका पूरा शरीर हिल गया .में झुंझला गया .माँ कुछ बताओ भी क्या हुआ ?
कोई जवाब न पा कर में वही कुरसी पर बैठ कर जूते मोज़े उतारने लगा . ऐ छुटकी पानी ला मैंने बहन को आ…