Wednesday, February 19, 2014

भास्कर मधुरिमा पेज़ २ पर मेरी कहानी 'शॉपिंग '…
http://epaper.bhaskar.com/magazine/madhurima/213/19022014/mpcg/1/

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वह अनजान औरत

पार्क में सन्नाटा भरता जा रहा था मैं अब अपनी समस्त शक्ति को श्रवणेन्द्रियों की ओर मोड़ कर उनकी बातचीत सुनने का प्रयत्न करने लगा। पार्क...