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कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -36- कविता वर्मा की कहानी...

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -35- कविता वर्मा की कहानी

असंवेदनशील आस्था

आज एक न्यूज़ चेनल पर शनि को प्रसन्न करने का एक उपाय बताया जा रहा था.१०८ मदार या आंकड़े के पत्तों कि माला बना कर हनुमानजी को चढ़ाई जाये जिससे शनि कि शांति होती है साथ ही हनुमानजी प्रसन्न होते हैं. हमारे देश में भगवान को प्रसन्न करके अपना काम निकलवाने कि मानसिकता बहुत आम है ओर इसके लिए भगवान को चढ़ावे के रूप में रूप में फल फूल,मिठाई मेवे पूजा कि अन्य सामग्री चढाने का आम रिवाज़ है.पता नहीं इस चढ़ावे से भगवान कितने खुश होते है लेकिन इस तरह के कर्मकांडों से प्रकृति को जो नुकसान होता है उसकी पूर्ति सालों में भी संभव नहीं हो पाती. 
समय समय पर इस तरह के नए नए कर्म काण्ड कि हवा चलती है ओर लोग बिना सोचे विचारे उन पर अमल करने लगते हैं फिर चाहे वह गणेशजी को दूध पिलाने कि बात हो या मदार के पत्तों कि माला बनाना ,श्री कृष्ण जी पर १००८ तुलसी पत्र चढ़ाना. तुलसी के १०८ या १००८ पत्ते रोज़ श्रीकृष्ण जी को चढाने से मनोकामना पूरी होती हो या ना होती हो लेकिन ये तय है कि अगर एक मोहल्ले के ५-७ लोग इस तरह का संकल्प ले लें तो उस मोहल्ले या कालोनी के सभी तुलसी के पौधे उजड़ जाते हैं.क्योंकि पूजा के नाम पर या संबंधो…