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रौशनी के अँधेरे

"किंशुक पूरे घर को दिये और मोमबत्ती से सजाना" मयंक ने कहा तो किंशुक चिंहुक उठी। बहुत अच्छा आइडिया है मयंक एकदम अलग लगेगा।  पूरा बंगला मोमबत्ती की झिलमिलाती रोशनी से जगमगा उठा और मयंक देर तक उनकी लौ को ताकता रहा। पहले तो किंशुक को लगा कि इस सजावट से अभिभूत हो कर मयंक उसमे खोया हुआ है। पर जब देर तक उसने मयंक को मोमबत्ती की लौ को ताकते देखा तो उसे अजीब सा लगा।  "मयंक क्या हुआ है ऐसे क्या देख रहे हो ?" वह कई बार उसके आसपास से गुजरी उससे बातचीत करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो थक कर बैठ गई और खो गई।   मयंक के प्रमोशन की खबर सुनकर  किंशुक ख़ुशी से झूम उठी थी।  मयंक अब तो तुम्हे सरकारी बंगला मिलेगा ना ?  हाँ बंगला गाड़ी ड्राइवर सभी मिलेगा। किंशुक की ख़ुशी से रोमांचित मयंक ने उसे बाँहों में लेते हुए कहा।  "वाह अब हम अफसरी शान बान के साथ रहेंगे सरकारी गाड़ी ड्राइवर क्या ठाठ होंगे। रिश्तेदारों जान पहचान वालों में इज्जत कई गुना बढ़ जाएगी।"  अचानक मयंक ने अपनी बाँहों का घेरा ढीला किया और फोन की तरफ बढ़ा। "हाँ अम्मा अब तुम्हार बिटवा बड़का अफसर हो गवा है। अब…

वीरान महफ़िल

वीरान महफ़िल 
बहुत रौनक थी उस पार्टी में बहत्तर तरह के भोज्य पदार्थ सुरा की नदियाँ खिलखिलाते कीमती कपड़ों की नुमाइश करते बड़े बूढ़े और जवान खूबसूरत चेहरे बातों ठहाकों से गूंजता माहौल और नेपथ्य में मधुर संगीत की स्वर लहरियाँ। 
पार्टी के होस्ट शिवराज जी कीमती साड़ी और लकदक जेवरों से सजी अपनी खूबसूरत पत्नी शालू की कमर में हाथ डाले गर्मजोशी से मेहमानों का स्वागत कर रहे थे। शालू भी तो अपनी मधुर मुस्कान और आत्मीयता से सबकी बधाइयाँ स्वीकार कर शादी के पच्चीसवीं सालगिरह की इस पार्टी को पूरी तरह सफल बनाने के लिए हर एक का ध्यान रख रही थीं। 
बहुत खुश थी शालू कि आज शिवराज उनके साथ हैं। सभी मेहमानों के सामने घुटनों के बल बैठ कर जब उन्होंने शालू से फिर शादी की रजामंदी मांगी तो वह किसी नवयौवना सी शर्मा गई। आज कोई भी उसकी किस्मत पर रश्क कर सकता था। 
खाने पीने के बाद मेहमान एक एक कर जाने लगे महफ़िल खाली होने लगी। शिवराज अब तक नशे में धुत्त हो चुके थे शालू बड़ी मुश्किल से उन्हें बैडरूम तक लाई। बिस्तर पर लिटा कर उनके जूते उतारने लगी तभी शिवराज नींद और नशे में बड़बड़ाये निशा डार्लिंग आय लव यू। 
कविता वर्मा

इंतज़ार

जब कहानियाँ लिखना शुरू किया था तब यह कहानी लिखी थी। समय के साथ लेखनी में कुछ परिपक्वता आई तो लगा इसे फिर से लिखना चाहिए। एक प्रयास किया है पढ़िए और बताइये कैसी लगी ?


युवा उम्र का आकर्षण कब प्रेम में बदल साथ जीने मरने की कसमे खाने लगता है बिना परिवार की राय जाने या अपनी जिम्मेदारियों को समझे। यथार्थ से सामना होते ही प्रेम के सामने एक अलग ही व्यक्तित्व नज़र आता है जिससे नज़रें मिलाना खुद के लिए ही मुश्किल होने लगता है। प्रेम में किसी को तो गहरी चोट लगती है और उसके निशान सारी जिंदगी के लिए सीने पर अंकित हो जाते हैं। उम्र के किसी पड़ाव पर जब बिछड़े प्रेम से सामना होता है तब अतीत किसी आईने की तरह असली चेहरा दिखा देता है और उसका सामना करना कठिन होता है। एक तरफ प्रायश्चित करने का बोध होता है तो दूसरी तरफ प्रेम पाने की ललक। तब क्या फैसला होता है युवा मन सा या उम्र को सम्मान देते हुए फिर परिस्थितियों के अनुसार। जानना दिलचस्प होगा मेरी कहानी इंतज़ार में।

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मातृभारती कथा कड़ी आइना सच नहीं बोलता

मातृभारती पर हमारा साझा उपन्यास आइना सच नहीं बोलता प्रकाशित हुआ है जिसे 13 लेखिकाओं ने मिल कर लिखा है। दिल्ली पुस्तक मेले में इस का लोकार्पण किया गया जिसे बेहतरीन प्रासाद मिला। इसकी अब तक 20 कड़ी प्रकाशित हो चुकी हैं। मोबाइल पर मातृभारती एप डाउनलोड करके आप इसे पढ़ सकते हैं। यह पहला प्रयोग है जिसमे पूरा उपन्यास ई बुक के रूप में है और अलग अलग लेखिकाओं के द्वारा लिखा गया है।
http://matrubharti.com/book/6191/

http://matrubharti.com/book/6337/

http://matrubharti.com/book/6441/

http://matrubharti.com/book/6541/

मातृभारती ई बुक्स पोर्टल

दोस्तों मातृभारती ई बुक्स का एक पोर्टल है जिस पर मेरी कहानियाँ प्रकाशित की गई हैं। आप मोबाइल में मातृभारती एप डाउनलोड करके इन्हें पढ़ सकते हैं। मेरी कहानियों के अलावा भी हजारों लेखकों की लाखों कहानियाँ यहाँ मौजूद हैं। मेरी कहानी डर , यात्रा , दलित ग्रंथि , आसान राह की मुश्किल , हैण्ड ब्रेक , जंगल की सैर ( बाल कहानी ) और बेटी के नाम पत्र के लिंक नीचे दे रही हूँ। कृपया पढ़ें और अपनी राय जरूर दें।
http://matrubharti.com/book/4580/

http://matrubharti.com/book/4470/

http://matrubharti.com/book/4298/

http://matrubharti.com/book/6024/

http://matrubharti.com/book/5492/

http://matrubharti.com/book/4169/

मातृभारती के होम पेज पर आप जा सकते है http://matrubharti.com/#homepage

सुविधा

पार्क की उस बेंच पर वे दो लड़के हमेशा दिखते थे मोबाइल में सिर घुसाये दीन दुनिया से बेखबर। रमेश और कमल रोज पार्क में घूमने आते उन्हें देखते और मुंह बिचकाते ये नई पीढ़ी भी एकदम बर्बाद है। कभी-कभी उनका मन करता उन्हें समझायें कि इस तरह उनकी आंखें और दिमाग खराब हो जायेगा पर युवा पीढ़ी की बदमिजाजी झेले हुए थे इसलिए हिम्मत नहीं होती थी। 
उस दिन एक लड़के ने दूसरे को अपना मोबाइल दिखाते हुए कुछ पूछा तो रमेश जी के कान खड़े हो गए। उन्होंने मोबाइल में देखना चाहा पर देख न पाये। कमल बाबू की तरफ देखा वह भी अचरज में थे। रहा न गया तो उस लड़के से पूछ ही लिया 'आप लोग मोबाइल में क्या करते रहते हो और अभी आप किस बारे में बात कर रहे थे।
लड़के ने उन दोनों को देखा फिर एकदूसरे को देखते हुए बोले हम पावर ब्रेक के मैकेनिज्म को पढ कर समझने की कोशिश कर रहे हैं। गरीब और स्वर्ण परिवार से होने के कारण कालेज में एडमिशन नहीं ले पाये पर हमारे दोस्त कालेज में हैं वे लेक्चर के वीडियो हमें भेज देते हैं जिन्हें देखकर हम सीखते हैं और एक गैराज में काम करते हुए प्रेक्टिस करते हैं। कभी-कभी इंटरनेट से भी लेक्चर डाउनलोड कर लेते है…

सूर्योदय सूर्यास्त और पीस पगोडा

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सुबह गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ों से नींद बहुत जल्दी खुल गई ये सब सुबह टाइगर पॉइंट पर जाने वाली गाड़ियाँ थीं जो कंचनजंघा पर सूर्योदय देखने जा रही थीं। हमने भी टैक्सी की बात की थी तो ड्राइवर ने कहा कोई फायदा नहीं है साब सुबह बादल हो जाते हैं कुछ दिखाई नहीं देता क्यों अपनी नींद ख़राब करते हैं। यह सुन कर हमने जाने  इरादा बदल दिया था पर अब नींद खुल ही गई थी और खिड़की से कंचनजंघा की चोटी दिख ही रही थी तो स्वेटर शॉल पहन कर खिड़की में खड़े हो गये। गहरे नीले जामुनी आसमान में धवल शिखर शान से सिर उठाये खड़ा था देखते ही देखते धुऐं की एक काली लकीर ने उसे ढँक लिया आसमान का रंग गहरे नीले से चमकीले नीले में बदलता जा रहा था और धवल शिखर कालिमा के आगोश में छुपता जा रहा था और देखते देखते पूरी तरह गायब हो गया। बहुत निराशा हुई सिर्फ इसलिए नहीं कि सूरज की पहली किरण से सुनहरी हुई चोटी को नहीं देख पाई बल्कि इसलिए भी कि जितना हम ज्ञान और जानकारी से लैस होते जा रहे हैं उतने ही कर्तव्यों से लापरवाह भी। लगातार चलती डीजल गाड़ियाँ उनके हॉर्न का शोर हमारा शोर धूल कचरा सुदूर प्राकृतिक स्थानों को भी इस कदर प्रदूषित कर चुका है…