Sunday, May 1, 2011

इंतजार ४

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया )अब आगे
घर में घुसते ही लगा आज माहौल में घुटन सी है .छोटी बहन मुझे देखते ही अंदर चली गयी . माँ चौके के दरवाजे पर खड़ी थी ,उसकी सूजी आँखे बता रही थी वह खूब रो चुकी है .दादी अपनी जप माला लिए मुझे ही देख रही थी भाभी भैया वहां नहीं थे भैया शायद आये नहीं थे और भाभी या तो कमरे में थी या चौके में . पिताजी का सदा का साथी अख़बार जमीन पर ओंधे मुंह पड़ा था . मैंने दिमाग पर जोर दिया की क्या बात हो सकती है ?तभी पिताजी गरजे -लो आ गए साहब बहादुर अब इन्ही से पूछो सच बात.
में सिटपिटा गया -माँ क्या हुआ?
माँ ने जोर जोर से रोना शुरू कर दिया .आँचल से मुंह ढके खड़े खड़े उनका पूरा शरीर हिल गया .में झुंझला गया .माँ कुछ बताओ भी क्या हुआ ?
कोई जवाब न पा कर में वही कुरसी पर बैठ कर जूते मोज़े उतारने लगा . ऐ छुटकी पानी ला मैंने बहन को आवाज़ लगाई.
वह मुझे पानी का गिलास पकड़ा कर तुरंत अंदर भाग गयी जैसे अगर वहां रुकी तो उस पर भी कोई गाज गिर पड़ेगी.
पानी का गिलास नीचे रखते मैंने फिर माँ से पूछा -माँ ये रोना धोना बंद करो और बताओ बात क्या है?
माँ ने सुबकते हुए कहा -तू आजकल किस लड़की के साथ घूमता फिरता है ?कहते हुए वह फिर सुबकने लगी.
ओह तो ये बात घर तक पहुँच गयी . में सन्न रह गया.मैंने इस बारे में कभी विचार ही नहीं किया .में तो अपने ख्वाबों की दुनिया में मधु के साथ प्रेम की पेंगे ले रहा था ऊँची और ऊँची . बिना धरातल की खुरदुराहट को महसूस किये .इस प्रश्न ने मुझे उस झूले से उतार कर जमीन पर खड़ा कर दिया था .
कौन है ये लड़की ?किस जात,खानदान की है?लड़की का बाप क्या करे है रे ?माँ को पुत्र मोह में बेबस जान कर अब दादी ने मोर्चा संभाला और एक साथ कई प्रश्न दाग दिए .
दादी के प्रश्नों के साथ माँ का रोना और बढ़ गया ,अब पिताजी गरजे -अब तू चुप कर तेरी गंगा जमना बहाने से मामला नहीं सुलटने का .अरे बोलने तो दे तेरे पुत्तर को .
मधु के सामने शेखी बघारते मेरा सीना चौगुना हो जाता था जो इस समय पिद्दी सा हुआ जा रहा था.क्या करूँ बोलूं या न बोलूं ?एक न एक दिन तो ये बात होनी ही है.पर आज मामला गरम है आज टाल दूं फिर माँ से बात करूंगा . मेरे मन में द्वन्द चल ही रहा था की दादी फिर बोल पड़ी -अरे मधुसुदन उस लड़की ने तेरी इतनी बुद्धि फेर दी की तेरा बाप कुछ पूछे है तुझसे और तुझे जवाब देने की जरूरत ही न है .
तिलमिला गया में अब इससे मधु का तो कोई लेना देना ही नहीं है पर अब तो आज ही बात करनी होगी. कुछ देर चुप्पी छाई रही . क्रमश  

8 comments:

  1. सस्पेंस बना हुआ है...

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  2. पार्ट कुछ बडे भी किये जा सकते हैं । बाकि तो पठन जारी है...

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  3. दोनों कड़ियाँ साथ में पढ़ीं ...रोचक ...साथ नहीं रहे तो कुछ तो हुआ ही होगा ...इंतज़ार है ..

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  4. पुरानी कडियां पढ कर टिप्पणी करूंगी ।

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  5. रोचकता कायम है..इंतज़ार है अगली कड़ी का..

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  6. दोनो कडि़या एक साथ पढ़ीं ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  7. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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