Posts

Showing posts from May, 2015

ऐसा भी होते रहना चाहिए

वैसे तो लिखने की आदत समय के साथ पनपी लेकिन धीरे धीरे इसमें मज़ा आने लगा। लेकिन ये लेखन कुछ छोटे मोटे लेखो तक ही सीमित था। गुणी जनो के संपर्क में आकर और कुछ गोष्ठियों में शामिल होते रहने से इसका फलक विस्तृत होता गया और कविता कहानियां लघुकथाओं तक जा पहुँचा। कभी सोचा न था अपना कहानी संग्रह छपेगा बस लिखने का सिलसिला थोड़ा सुचारू गति से चल निकला फिर एक ख्याल सपना बन कर जेहन पर छा गया और धीरे धीरे लगा कि एक सपना आकार ले रहा है। 
अपने प्रथम कहानी संग्रह 'परछाइयों के उजाले 'पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने की उत्सुकता किसे नहीं रहती। जान पहचान वालों की प्रतिक्रियाओं में एक अौपचारिकता भी छुपी रहती है। हालांकि अधिकतर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक ही रहीं। कई मित्रों ने जिनमे कैलाश शर्मा जी राहुल वर्मा जी ने खुद हो कर पुस्तक समीक्षा भी लिखी जिसे समय समय पर ब्लॉग पर डालती भी रही हूँ। 
फिर भी कई बार लगता था कुछ और सटीक कुछ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिले तो खुद का सटीक आकलन कर पाऊँ। इसी सिलसिले में मेरी पुस्तक बुरहानपुर गई वहाँ डॉक्टर वीरेंद्र निर्झर जी ने समीक्षा लिखी जिनसे आज तक नहीं मिली। बस समीक्षा …