Posts

Showing posts from December, 2016

सूर्योदय सूर्यास्त और पीस पगोडा

Image
सुबह गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ों से नींद बहुत जल्दी खुल गई ये सब सुबह टाइगर पॉइंट पर जाने वाली गाड़ियाँ थीं जो कंचनजंघा पर सूर्योदय देखने जा रही थीं। हमने भी टैक्सी की बात की थी तो ड्राइवर ने कहा कोई फायदा नहीं है साब सुबह बादल हो जाते हैं कुछ दिखाई नहीं देता क्यों अपनी नींद ख़राब करते हैं। यह सुन कर हमने जाने  इरादा बदल दिया था पर अब नींद खुल ही गई थी और खिड़की से कंचनजंघा की चोटी दिख ही रही थी तो स्वेटर शॉल पहन कर खिड़की में खड़े हो गये। गहरे नीले जामुनी आसमान में धवल शिखर शान से सिर उठाये खड़ा था देखते ही देखते धुऐं की एक काली लकीर ने उसे ढँक लिया आसमान का रंग गहरे नीले से चमकीले नीले में बदलता जा रहा था और धवल शिखर कालिमा के आगोश में छुपता जा रहा था और देखते देखते पूरी तरह गायब हो गया। बहुत निराशा हुई सिर्फ इसलिए नहीं कि सूरज की पहली किरण से सुनहरी हुई चोटी को नहीं देख पाई बल्कि इसलिए भी कि जितना हम ज्ञान और जानकारी से लैस होते जा रहे हैं उतने ही कर्तव्यों से लापरवाह भी। लगातार चलती डीजल गाड़ियाँ उनके हॉर्न का शोर हमारा शोर धूल कचरा सुदूर प्राकृतिक स्थानों को भी इस कदर प्रदूषित कर चुका है…

कैसे प्रकृति प्रेमी थे वे लोग

Image
बहुत दिनों बाद अपने सफर पर फिर निकली हूँ। मैं जानती हूँ आप लोग मेरे ब्लॉग पर नियमित आते हैं अगली पोस्ट के इंतज़ार में और यही कारण अगली क़िस्त लिखने की प्रेरणा भी देता है।  आज हम चलेंगे दार्जिलिंग की सैर पर।  न्यू जलपाई गुड़ी से सड़क मार्ग द्वारा ही दार्जिलिंग पहुँचा जा सकता है शेयरिंग टैक्सी में आठ दस लोगों के साथ पहाड़ी रास्ते का पहला सफर करना बहुत तनाव दे रहा था। फिर पता चला जो टैक्सी दार्जिलिंग से सवारी छोड़ने आती हैं वो वापसी में कुछ कम में न्यूजलपाईगुड़ी से सवारी ले जाती हैं। उसके लिए रेलवे स्टेशन पर टैक्सी ड्राइवर से संपर्क करके उन्हें अपना नंबर दे दिया जाये तो वे खुद संपर्क कर लेते हैं। सुबह जल्दी स्टेशन पर पहुँच कर भी ऐसी गाड़ियाँ मिल जाती हैं। हमें भी एक इनोवा मिल गई जिसमे गाड़ी का मालिक और ड्राइवर वापस दार्जिलिंग जा रहे थे।  न्यूजलपाईगुड़ी से सिलीगुड़ी होते हुए रास्ता है। सिलीगुड़ी में छोटी रेल लाइन है इसलिए न्यूजलपाईगुड़ी ही अंतिम मुख्य स्टेशन है। सिलीगुड़ी  से दार्जिलिंग का रास्ता बेहद खूबसूरत है। सड़क के दोनों ओर ऊँचे ऊँचे कतार में लगे पेड़ जिनके नीचे फर्न और दूसरे छोटे पौधों का हरा गली…