Saturday, June 11, 2011

यादें

कभी सोचती हूँ
दिमाग जो होता एक डिबिया
निकाल कर देखती उसमे पड़े
विचार,भाव रिश्ते-नाते ,
यादें ,एहसास,घटनाएँ
हौले से छूकर सहलाती
संचेतना भरती उनमे
हंसती, रोती, खिलखिलाती
फिर महसूसती उन्हें

करीने से फिर रखती
छांट बाहर करती
अगड़म -बगड़म विचार
टूटे बेजान रिश्तों के तार
टीसते एहसास

खाली पड़े कोनों को भर देती
किसी सुंदर विचार से
सुनहरी यादों की गोटी किनारी से
सजा लेती डिबिया

लेकिन,
उस एक अनाम से रिश्ते
जाने अनजाने से नाम
कुछ अनबूझे से भाव ,
कुछ कसकती बातें, यादें
झाड़ पोंछ कर फिर सहेज देती
छुपा देती फिर किसी कोने में
चाह कर भी न निकाल पाती
निकाल कर भी न भुला पाती
वो बसी है दिल में कहीं गहरे
बहुत गहरे .

27 comments:

  1. खाली पड़े कोनों को भर देती
    किसी सुंदर विचार से
    सुनहरी यादों की गोटी किनारी से
    सजा लेती डिबिया
    pyaare khyaal

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  2. यादों को करीने से रखने से भी वो तीतर-बीतर हो जाती हैं। और छुपा कर रख देने पर तो वो और भी कुरेदती रहती हैं।

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  3. यादें कुछ ऐसी ही होती हैं,
    जिन्हे सहेजा जाता है।
    जाने अनजाने रिश्ते भी,
    यादों के खजाने मे जमा होते हैं।

    सुंदर भाव

    आभार

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  4. अगड़म -बगड़म विचार...लेखकों/कवियों की बीमारी है...बाकी दुनिया देखो कितने मज़े में है...सिर्फ अपने लिए जिसने जीना सीख लिया...तो...फालतू के विचारों से मुक्ति मिल जायगी...लेकिन फिर क्या ऐसी कविता मिल पायेगी...

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  5. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति .. सचमुच यह दिमाग चाही अनचाही हर बात को याद रख हमारे लिए परेशानी खडी करता है !!

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  6. पा देती फिर किसी कोने में
    चाह कर भी न निकाल पाती
    निकाल कर भी न भुला पाती
    वो बसी है दिल में कहीं गहरे
    बहुत गहरे
    marmik abhivyakti .aabhar

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  7. खाली पड़े कोनों को भर देती
    किसी सुंदर विचार से
    सुनहरी यादों की गोटी किनारी से
    सजा लेती डिबिया ....
    नारी सुलभ रचनात्मकता इसी भाव के कारण हमारे देश में सुन्दर घर दिखाई देते हैं और वाकई दिमाग भी जब रचनात्मक विचारों से पूर्ण हो तो ऐसी सुंदर कविता जन्म लेती है

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति !

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  9. मानवीय भावों की सांकेतिक अभिव्यक्ति, यह रचना अच्छी लगी ....शुभकामनायें !!

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  10. यादें यूँ ही मन को कुरेदती रहती हैं ...सुन्दर प्रस्तुति

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  11. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (13-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. कभी सोचती हूँ
    दिमाग जो होता एक डिबिया ...
    beautiful imagination.

    A lovely post !!!

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  13. यादो की सच्ची अभिव्यक्ति ... बहुत खूब --

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  14. सुंदर भावों का चित्रण .... प्रशंसनीय है बधाई जी

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  15. एक भावपूर्ण बेहतरीन रचना... बधाई

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  16. यादें कुछ ऐसी ही होती हैं,
    जिन्हे सहेजा जाता है।
    जाने अनजाने रिश्ते भी,
    यादों के खजाने मे जमा होते हैं।

    वाह ... बहुत खूब ।

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  17. प्रशंसनीय सुन्दर चित्रण
    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द, हमेशा की तरह अनुपम प्रस्‍तुति ।

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  18. छुपा देती फिर किसी कोने में
    चाह कर भी न निकाल पाती
    निकाल कर भी न भुला पाती
    वो बसी है दिल में कहीं गहरे
    बहुत गहरे .
    ...

    क्या इतना आसान होता है यादों को भूल जाना...बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति...शब्दों और भावों का सुन्दर संयोजन..

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  19. बहुत ही सुन्दर...प्यारी चीजो को संजोकर रखने में बड़ा मजा है !

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  20. खाली पड़े कोनों को भर देती
    किसी सुंदर विचार से
    सुनहरी यादों की गोटी किनारी से
    सजा लेती डिबिया

    यादें भूलना दुष्कर कार्य है. सुंदर रचना का स्वागत.

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  21. खाली पड़े कोनों को भर देती
    किसी सुंदर विचार से
    सुनहरी यादों की गोटी किनारी से
    सजा लेती डिबिया

    Khoob likha aapne..... Bahut sunder

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  22. सुन्दर एहसास ...
    यादें तो यादें हैं

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  23. यादो की सच्ची अभिव्यक्ति,बहुत खूब!!!!

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  24. बहुत ही खूब लिखा है आपने.
    काश ऐसा हो पाता.
    हाफ्ज़ा ही न हो तो अच्छा है.

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  25. चाह कर भी न निकाल पाती
    निकाल कर भी न भुला पाती
    वो बसी है दिल में कहीं गहरे
    बहुत गहरे .

    सुंदर लेखन....बहुत सुंदर भाव...

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