Wednesday, June 6, 2018

जरूरी है बारिश का पानी सहेजना

कल विश्व पर्यावरण दिवस पर सिरपुर तालाब पर नेचर वालेंटियर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मैंने भी बारिश के पानी को सहेजने के बारे में कुछ बिंदु बताए।

हमने घरों में कच्ची जमीन नहीं छोडी छत पर गिरने वाले पानी को ड्रेनेज में बहा देते हैं जिससे कम वर्षा में नदी नालों में बाढ़ आ जाती है और पानी बर्बाद होता है।

बड़े मैदानों में गाडियों की आवाजाही से जमीन ठोस हो गई है जिससे पानी अंदर नहीं जा पाता बल्कि बह जाता है।

जमीन की गहराई में पानी न जाने के कारण जमीन का तापमान बढ़ रहा है इसलिए गर्मी बढ़ रही है और पेड़ लगाने पर बहुत देखभाल करना पड़ती है।

बारिश के पानी को रोकने सहेजने के उपाय बहुत आसान और सस्ते सरल हैं। बस यह सोचिये कि इसमें जो कुछ सौ हजार रुपये आप खर्च कर रहे हैं वह आपके बच्चों के लिए विरासत है।

घर के सामने अगल-बगल खाली प्लॉट को साफ करवा कर कुदाली से खुदवा दीजिए। जमीन में बारिश का पानी आसानी से समा जायेगा।
सड़क पर बहते पानी को कच्ची जमीन की तरफ मोड़ दें।
पानी के बहाव के रास्ते में 4*4*4फीट के गढ्ढे करवा कर उनमें आसपास पडे ईंट पत्थर भरवा दें (ताकि कोई दुर्घटना न हो)। बारिश का पानी आसानी से जमीन में समा कर ग्राउंड वॉटर लेवल बढायेगा।

याद रखें आपके यहाँ ट्यूब वेल नहीं है फिर भी जमीन में पानी जाने की जुगत लगाएं क्योंकि इससे जमीन ठंडी होगी और गर्मी कम।
कविता वर्मा

3 comments:

  1. सहमत आपकी बात से ...
    बल्कि आज से ज़्यादा पुराने समय में होता था जल संरक्षण ...

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन उपग्रह भास्कर एक और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. जल बहुत जल्द ज्वलंत समस्या होगी अगर समय रहते नहीं चेते तब !मंगलकामनाएं आपको !

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