Saturday, June 27, 2015

छू लिया आसमान


बचपन से वह उस पहाड़ी को देखती आ रही थी। उबड़ खाबड़ रास्ते फैले झाड़ झंखाड़ और फिसलन के बीच से उसकी चोटी पर वह बड़ा सा पत्थर सिर उठाये खड़ा था। मानों चुनौती दे रहा हो दुनिया को है हिम्मत इन दुर्गम रास्तों को पार कर मुझ तक पहुँचने की ?आसमान को छू लेने की ?
उसने भी हमेशा सपना देखा था एक दिन वह वहाँ तक जरूर पहुँचेगी लेकिन इतना आसान तो ना था। 
रास्ते के छोटे पत्थरों से रोड़े तो उसकी पढाई में भी आये।लोगों की कंटीली बातें ताने सुन कर उनसे अपने आत्मविश्वास को लहूलुहान होने से बचाते उसने नौकरी शुरू की। पुरुष मानसिकता की कीचड भरी फिसलन में खुद को संभालते संभालते आज जब उसका प्रमोशन ऑर्डर हाथ आया उसका मन चोटी की उस बड़ी चट्टान पर उछल कर मानों आसमान को छू रहा था। 
 कविता वर्मा 

6 comments:

  1. म्हणत सफल हो तो उम्मीद भी जागती है ... आशावान भाव लिए ..

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (29-06-2015) को "योग से योगा तक" (चर्चा अंक-2021) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. वाह कविता जी बहुत अच्छी उड़ान थी ये

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  4. आपकी पोस्ट पढ़कर इस सन्दर्भ में २०१० में "संघर्ष की सुखद अनुभूति" नाम से लिखी कविता टिप्पणी के रूप में प्रस्तुत कर रही हूँ। .

    आशा और निराशा के बीच
    झूलते-डूबते-उतराते
    घोर निराशा के क्षण में भी
    अविरल भाव से लक्ष्य प्राप्ति हेतु
    आशावान बने रहना बहुत मुश्किल
    पर नामुमकिन नही
    होता है इसका अहसास
    सफलता की सीढ़ी-दर-सीढ़ी
    चढ़ने के उपरांत
    चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
    मिलने वाली हर ख़ुशी बेजोड़ व अनमोल है
    क्योंकि इसकी सुखद अनुभूति
    वही महसूस कर सकता हैजिसने
    हर हाल में रहकर अपना सघर्ष जारी रखकर
    कोशिश की सबको साथ लेकर
    निरंतर बने रहने की
    कभी भाग्य के भरोसे नहीं बैठे
    लगे रहे कर्म अपना मानकर
    और सफलता के मुकाम पर पहुचे
    सगर्व, सम्मान
    तभी तो कहा जाता है
    आदमी अपने भाग्य से नहीं
    अपने कर्म से महान होता है
    छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
    कोई बड़ी जंग जीतता है

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