"परछाइयों के उजाले " प्रतिक्रिया

मेरे प्रथम कहानी संग्रह "परछा इयों के उजाले " पर "बेअदब साँसे "के रचयिता श्री राहुल वर्मा जी कि प्रतिक्रिया अभी अभी प्राप्त हुई जिसे मैं आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ।


Comments

  1. "परछाइयों के उजाले" की सभी कहानियां तो मैने भी पढ़ी हैं, कई कहानी इतनी करीब से गुजर गई, लगा कि ये अपने ही इर्द गिर्द बुनी हुई तो नहीं ..कहानी के पात्र वाकई असल जिंदगी के बहुत करीब लगते हैं। पात्रों के भाव और उनके अहसास को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उसकी जितनी भी प्रशंसा हो कम है। पुस्तक के बारे में कुछ भी कहने में मेरे पास शब्दों की कमी हो जाती है, खैर
    राहुल खुद लेखक है, इन्होंने जिस तरह किताब की बात की है, लग रहा है मेरे मन की बात थी, जिसे आपने कह दिया। पुस्तक के लिए कविता जी को और पुस्तक की जीवंत समीक्षा के लिए राहुल को ढेर सारी शुभकामनाएं

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  2. अभी तक मैंने किताब तो नहीं पढ़ी पर राहुल जी की यह सुन्दर समीक्षा इस बात का प्रमाण है की किताब वाकई खुबसूरत है। बधाई

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  3. मेरी तरफ से भी बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई.मैं भी पढ़ना चाहती हूँ पर कैसे मिलेगी..?

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  4. bahut-bahut shubhkamnayen.....padhke batati hun..

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  5. बहुत बहुत शुभकामनाएं !!

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  6. बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ !!

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