Friday, April 12, 2013
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अपने सारथी हम खुद
अपने सारथी हम खुद अगले दिन सुबह उठे तो कहीं जाने की हड़बड़ी नहीं थी। आज हमें उन्हीं जगह पर जाना था जहाँ अपनी गाड़ी से जाया जा सकता था। कि...
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खरगोन इंदौर के रास्ते में कुछ न कुछ ऐसा दिखता या होता ही है जो कभी मजेदार विचारणीय तो कभी हास्यापद होता है लेकिन एक ही ट्रिप में तीन चार ऐ...
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बात तो बचपन की ही है पर बचपन की उस दीवानगी की भी जिस की याद आते ही मुस्कान आ जाती है। ये तो याद नहीं उस ज़माने में फिल्मों का शौक कैसे और ...
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बात सन 80 की है। पापाजी का झाबुआ जिले के राणापुर से इंदौर ट्रांसफर हुआ था। इंदौर में खुद का मकान था जिसमें कभी रहे नहीं थे। हम तो बहुत छोटे...




कविता जी मेरा ब्लाॅग देखिएगा इस लिहाज से कि प्रकाशित कहानियों के साथ पूरी कहानी को कैसे पढ़ाया जाए। शायद आपको मेरा तरीका पसंद आएगा। आशा है अन्यथा नहीं लेंगी। आपकी कहानी पढ़ना चाहता हूं।
ReplyDeletehttp://alwidaa.blogspot.in/search/label/%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A5%9C%20.....story%20%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%B0%20%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E2%80%98%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E2%80%99
http://alwidaa.blogspot.in/
ReplyDeleteवाह!!! बहुत बढ़िया | आनंदमय | आभार
ReplyDeleteकभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page
हार्दिक बधाई!
ReplyDeleteबहुत - बहुत बधाईयाँ कविता जी |
ReplyDeleteजानकार हार्दिक खुशी हुई,बहुत२ बधाई कविता जी ...
ReplyDeleteRecent Post : अमन के लिए.
बहुत-बहुत मुबारकबाद
ReplyDeletewow.. congratulations !!
ReplyDeleteप्रकाशन के लिए बधाई
ReplyDeleteबधाई कविता जी.
ReplyDeleteनवसंवत्सर की शुभकामनाएँ.
बधाई ... प्रकाशन पे बधाई ...
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई कविता जी.
ReplyDeletebadhai prakashan ke liye .. hamne padhi thi.. :)
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