Tuesday, April 9, 2013

जब तुम लौटोगे




जब तुम लौटोगे 
खिले फूल बेरंग हो मुरझा चुके होंगे। 

अठखेलियाँ करती नदी थक कर 
किनारों पर सर रखे सो गयी होगी। 
तुम्हारे इंतज़ार में खड़ा चाँद 
गश खाकर गिर पड़ा होगा 
धरती और आसमान के बीच गड्ढ़ में।  

आँखों की नमी सूख चुकी होगी 
चहकते महकते कोमल एहसास 
बन चुके होंगे पत्थर। 

लेकिन तुम एक बार आना जरूर 
देखने तुम्हारे बिना 
कैसे बदल जाता है संसार। 

11 comments:

  1. हँसी यादों में गुम हो जाती है
    रह जाता है केवल क्रंदन ....अच्छी रचना
    डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

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  2. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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  3. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त

    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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  4. उम्दा, बहुत प्रभावी प्रस्तुति !!! कविता जी

    recent post : भूल जाते है लोग,

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  5. सुन्दर रचना, काफी दिनों बाद आपकी कविताई पढने मिली....

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  6. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।

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  7. तुम्हारे बिन गुजारे हैं...

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  8. बहुत ही उम्दा भावपूर्ण कविता का सृजन,आभार.

    "जानिये: माइग्रेन के कारण और निवारण"

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  9. सुंदर भावभरी रचना.अच्छी प्रस्तुति .बधाई .

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  10. ऐसे भी किसी को बुलाया जाता है क्या ? :-)

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