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Friday, April 12, 2013

मील का पत्थर

वनिता अप्रेल अंक में मेरी कहानी "परछाइयों के उजाले"...
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13 comments:

  1. कविता जी मेरा ब्लाॅग देखिएगा इस लिहाज से कि प्रकाशित कहानियों के साथ पूरी कहानी को कैसे पढ़ाया जाए। शायद आपको मेरा तरीका पसंद आएगा। आशा है अन्यथा नहीं लेंगी। आपकी कहानी पढ़ना चाहता हूं।
    http://alwidaa.blogspot.in/search/label/%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A5%9C%20.....story%20%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%B0%20%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E2%80%98%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E2%80%99

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  2. वाह!!! बहुत बढ़िया | आनंदमय | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. हार्दिक बधाई!

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  4. बहुत - बहुत बधाईयाँ कविता जी |

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  5. जानकार हार्दिक खुशी हुई,बहुत२ बधाई कविता जी ...

    Recent Post : अमन के लिए.

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  6. प्रकाशन के लिए बधाई

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  7. बधाई कविता जी.

    नवसंवत्सर की शुभकामनाएँ.

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  8. बधाई ... प्रकाशन पे बधाई ...

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  9. बहुत बहुत बधाई कविता जी.

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  10. badhai prakashan ke liye .. hamne padhi thi.. :)

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