Posts

Showing posts from February, 2010

होली

आज ईद है पर हमारे स्कूल में छुट्टी नहीं थी.सभी को गुस्सा आ रहा था.वैसे भी आज स्कूल का आखरी दिन था.२ मार्च से परीक्षाएं हैं । बच्चे भी पढ़ने के मूड में नहीं रहते। सभी सोच रहे थे की आज छुट्टी होती तो कितना अच्छा होता। कल घर जाते हुए सभी के मुह पर एक ही बात थी ,अरे यार!कल भी आना है। फिर भी हमने निश्चय किया ,की आज सब चटकीले रंगों की साड़ियाँ पहन कर आयेंगे।आज स्कूल भी आधे दिन का था इसलिए बच्चे भी कम आये थे,और आखरी दिन था इसलिए वे भी पढ़ने के मूड में नहीं थे। सारा दिन टीचेर्स को थेंक्यु देने का सिलसिला चलता रहा । बच्चों ने पूछा भी आज क्या खास है सभी मेम साड़ी पहन कर क्यों आयी है? (हमारे यहाँ टीचेर्स सलवार सूत भी पहनती हैं) तो हमने कहा ,की आप को गुड लक कहने । बच्चे भी बड़े खुश हुए।बच्चों की छुट्टी के बाद हमारी मीटिंग थी । मीटिंग चाहे कैसी भी हो सभी का मुंह बन जाता है । पर खैर जाना तो था। शुक्र है ज्यादा लम्बी नहीं थी तो हम जल्दी ही फुर्सत हो गए ।मीटिंग के बाद मैं भागी और पर्स में से गुलाल की पुडिया निकाली और सभी के माथे पर टीका लगाया ,और होली है का धमाल मचाया। गुलाल लगते ही सब होली की मस्ती …

स्त्री मूल्य

Image
स्कूल से घर आते समय रास्ते पर भीड़ देखी,तो रुक कर लोगो से पूछा ,क्या हुआ?पता चला पास ही रहने वाले आदिवासी परिवार की एक लड़की को किसी लडके ने मोबाइल पर फोन किया और मिलने के लिए बुलाया.उस लडके को लड़की के घरवालों ने पकड़ लिया और अब उसकी धुलाई हो रही है। वह परिवार काफी दिनों से वहा रह रहा था ,और उस लड़की को भी मैं अच्छे से जानती थी ,इसलिए मैं भी उसे देखने वहा चली गयी । वहा जा कर देखा की जिस लडके ने फ़ोन किया था वह तो भाग गया पर उसका दोस्त पकड़ में आ गया,अब उसकी पिटाई हो रही थी.किसी तरह उसकी पिटाई बंद करवाई और उसके घरवालों को फोन करने को कहा। तभी लड़की का मामा आ गया और उसने भी लडके को ४-६ लात घूंसे जमा दिए आखिर लड़की की इज्जत से उनकी इज्जत है। बात करने पर पता चला की लड़की ने फ़ोन नंबर अपनी सहेली को दिया था और उस सहेली से उसके भाई ने ले लिया।
दूसरे दिन से लड़की का स्कूल जाना बंद हो गया,घर से निकलना बंद हो गया,सभी ने उसके माँ-पिताजी को समझाया ,लड़की है पढ़ लिख जायेगी तो बाद में उसका ही भला होगा पर पिता की चिंता थी लड़की के पढ़ने से उसका भला होगा जब होगा , पर अगर लड़की किसी के साथ भाग गयी तो …

दूध और मलाई

Image
बचपन की जब यादे आती है तो याद आती है वे छोटी मोती शरारतें ,लड़ना झगड़ना,और छोटी मोटी गुस्ताखियाँ,जो उस समय निच्छल मन से की गयी हरकतें थी.बात जब की है जब हम रतलाम में रहते थे.न्यू रोड पर एक बड़ी सी बिल्डिंग जिसमे कई सारे किरायेदार रहते थे.उनका दूध,पेपर,पानीवाला,साझा और हर घर के सुख-दुःख साझे। दिन में सभी ओरतें गेलरी में बैठ जाती थी और घर के तमाम काम मिलबांट कर चुटकियों में हो जाते थे। वही बैठ कर घर गृहस्थी की तमाम समस्याओं का समाधान हो जाता था।
इन्ही दिनों मम्मी बहुत परेशान रहती थी कारण था दूधवाला दूध बहुत पतला ला रहा था.उसमे से मलाई नहीं निकलती थी जिससे घी नहीं बन पाता था.और हर महीने घी खरीदने में घर का बजट बिगड़ जाता था।
रोज़ सुबह जब दूध वाला आता मम्मी उस पर नाराज़ होती और वो कहता भौजी मैं तो बढ़िया दूध लाता हूँ बिल्डिंग में सभी को देता हूँ पूछ लो.अब उसके सामने तो कोई कुछ नहीं बोलता था ,पर दिन की पंचायत में सभी मम्मी को समझाते की दूध तो बढ़िया आ रहा है हर पंद्रह दिन में एक पाव से ज्यादा घी निकल जाता है, और मम्मी थीं की उस दूध वाले को बंद कर दूसरे दूधवाले की बंदी लगाने को तैयार थी .एक द…