Saturday, December 11, 2010

प्रतिध्वनि

पहाड़ों से टकराकर
हर आवाज़ लौट
आती है ,
कितनी ही आवाजें
हो गयी है
गुम ,
मेरी आवाज़ ही
पहुंची नहीं
पहाड़ों तक ,

या पहाड़ ही
अब पत्थर
हो गए है?

3 comments:

  1. अच्छी कविता है.पहाड़ अब पत्थर बन गए हैं .
    ................
    क्रिएटिव मंच आप को हमारे नए आयोजन
    'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में भाग लेने के लिए
    आमंत्रित करता है.
    यह आयोजन कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे से शुरू हो रहा है .
    आप का सहयोग हमारा उत्साह वर्धन करेगा.
    आभार

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  2. kaun jane ye pahaad patthar hain yaa awaazen gum gai

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