Wednesday, April 14, 2010

यशी

स्कूल में मेरी छवि एक सख्त टीचर की है,उस पर विषय भी गणित ,तो विषय की मांग है विद्याथियों की एकाग्रता ,जो इस छवि में और भी सितारे जोड़ देती है.वैसे भी इतना कुछ होता है विद्यार्थियों को बताने के लिए की फालतू बातों के लिए समय भी नहीं होता, और यहाँ वहां की बाते करना मुझे सुहाता भी नहीं है। पिछले साल की बात है कक्षा ५ की एक लड़की ज्यादातर समय स्कूल से अनुपस्थित रहती थी ,उसकी कॉपी पूरी करवाना और पिछला सबक समझाना बहुत मुश्किल होता था। वैसे भी जो बात क्लास की पढाई में होती है वो एक विद्यार्थी को बैठा कर पढ़ाने में नहीं आती.इस पर जब भी उससे बात करो वो सर झुका कर चुपचाप खडी हो जाती ,न कुछ बोलना, न जवाब देना .काफी दिनों तक वह स्कूल नहीं आयी ,फिर बच्चों से ही पता चला की वो बीमार है ।

एक दिन स्टाफ रूम में बात करते हुए उसकी बात निकली तो मालूम हुआ कि उसकी माँ उसे छोड़ कर चली गयी है और दूसरी शादी कर ली है ,वह अपने दादा-दादी और पापा के साथ रहती है.वो काफी बीमार भी रहती है.सुन कर बहुत अफ़सोस हुआ.जब वह वापस आयी तो मैंने उसका विशेष ध्यान रखना शुरू किया।

इसी बीच स्कूल में परेंट- टीचर मीटिंग थी,जिसमे में उसके पापा आये,और बड़े ही जोश से भरे कहने लगे कि अपनी बेटी को तो मैं हो पढ़ता हू और वह गणित में काफी अच्छी है ,हाँ इस साल कुछ ज्यादा बीमार रही है इसलिए थोडा पिछड़ गयी है। मैंने भी कहा ठीक है आप भी ध्यान रखिये और जो भी कठिनाई उसे होगी मैं भी ध्यान रखूंगी।

एक बार फिर वह दो दिन नहीं आयी ,मैंने पूछा यशी क्यों नहीं आयी ,किसी को पता नहीं था कि क्या हुआ .जब वह आयी तो बहुत खुश थी और पूछने के पहले ही कहने लगी ,मम मेरे पापा शादी कर रहे है मेरे लिए नयी मम्मी लायेंगे .सुन कर और उसे खुश देख कर बहुत ख़ुशी हुई .मैंने पहली बार उसे इतना खुश देखा था।ये बात उसने हर टीचर को बताई ,फिर एक दिन कहने लगी मम मैं भी अपने पापा के साथ घूमने जाउंगी वो बहुत खुश थी । उसके पापा कि शादी के पहले ही उसने बता दिया कि मैं अब १० दिन नहीं आउंगी पहले शादी में हम जयपुर जायेंगे फिर घूमने जायेंगे .मैंने भी कहा ठीक है खूब मजे करना।

४-५ दिन बाद ही वो स्कूल आयी ,चुपचाप सर झुकाए जैसे ही मैं क्लास में पहुंची बच्चे चिल्लाये मम ,यशी आ गयी,सुनकर मैं भी चौंक गयी ,अरे वो तो १० दिन बाद आने वाली थी ,मैंने पूछा शादी कैसी हुई खूब मजे किये ,उसने आँखों में आंसू भर कर कहा यस मम ,फिर?पापा मम्मी को लेकर घूमने चले गए मुझे नहीं ले गए । अरे तो क्या हुआ बेटा , तुम जाती तो तुम्हारी पढाई का कितना नुकसान होता फिर हम सब भी तो तुम्हे रोज़ याद करते थे ,है न बच्चों ?मैंने पूछा सब ने एक स्वर में कहा यस मम ।

अब यशी पहले से भी अधिक गुमसुम रहने लगी ,न उसका पढ़ाने में मन लगता न किसी से बात करती ,एक दिन मैंने उससे बात की तो बोली ,मम पापा अब सिर्फ मम्मी का ध्यान रखते है,हर समय उनके आगे पीछे रहते है, रोज़ शाम को उन्हें घूमने ले जाते है,पर मुझे कभी भी साथ नहीं ले जाते ,मैं कहती हू तो मुझे दांत देते है,मैंने कहा तुम्हारे दादा-दादी कुछ नहीं कहते ,तो उसकी आँखों में आंसू भर आये कहने लगी वो भी मुझे दांत देते है । अब पापा न मुझ से बात करते है न मुझे पढ़ते है। मैंने कहा बेटा मम्मी अभी यहाँ नई है न इसलिए पापा उन्हें घुमाने ले जाते है,फिर अगर तुम रोज़ -रोज़ उनके साथ जाओगी तो पढाई कब करोगी ? इसलिए नहीं ले जाते ,फिर अब तो तुम भी बड़ी हो गयी हो ,थोड़ी पढाई खुद कर सकती हो,और अगर कोई परेशानी आये तो मुझे बताना मैं तुम्हारी मदद करूंगी । कह कर मैंने उसके सर पर हाँथ फेरा .वह थोड़ी आश्वस्त हो कर चली गयी .फिर भी उसका मन न लगा ।

स्कूल ख़त्म होने को आये,आखरी दिन यशी मेरे पास आईए और बोली ,मम मैं जा रही हू,मेरे पूछने से पहले ही उसके साथ आयी लड़कियाँ बोलने लगी मम यशी स्कूल छोड़ रही है ,क्या?? चौंक पड़ी मैं,कहाँ जा रही हो तुम ?किसी और स्कूल में ? नहीं मम इंदौर में नहीं ,पापा मुझे हॉस्टल में भेज रहे है .अंदेशा तो मुझे भी था पर इतनी जल्दी सब इतना बदल जायेगा मालूम न था। मैंने उसे बांहों में भर लिया और कहा बेटा कोई बात नहीं तुम बहुत समझदार हो वहा तुम्हे ढेर साडी सहेलियें मिलेंगी ,तुम ज्यादा मजे करोगी ,और तुम मन लगा कर पढ़ना ,जब भी इंदौर आओ यहाँ जरूर आना हमसे मिलाने .और वो चली गयी

छुट्टियों के बाद पहले दिन वो मुझे फिर मिली ,मम अरे यशी तुम ?कैसी हो बेटा ?बहुत ख़ुशी हुई उसे देख कर,मम मैं ठीक हू.क्या हुआ?मैंने पूछा,मम दादाजी को मालूम नहीं था कि मैं होस्टल जा रही हू जब उन्हें मालूम पड़ा तो उन्होंने पापा को बहुत दांता और कहा कि अब इसे कही भेजने कि बात कि तो मैं तेरी पिटाई करूंगा । पिटाई कि बात कहते हुए ख़ुशी से उसकी आँखे चमक रही थी । मुझे भी बड़ी ख़ुशी हुई ,वह फिर बोली मम नयी मम्मा प्रेग्नेंट है इसलिए पापा उन्ही का ध्यान रखते है , हाँ बेटा इस समय उन्हें ज्यादा जरूरत है न और अब तो यशी बहुत समझदार हो गयी है.यस मम इस साल मैं खुद ही पढाई करूंगी ,और अच्छे मार्क्स लुंगी ,वैरी गुड बेटा और कभी भी कोई भी परेशानी हो मुझे बताना ,यस मम ,और वो चली गयी ।

कल अच्कांक वो आयी और बोली मम ,यशी कैसी हो बेटा ?वो कुछ नहीं बोली उसने मेरी और देखा उसकी आँखों में अजीब सी उदासी थी वो चुपचाप खडी रही,फिर धीरे से उसके हांथों में हरकत हुई जैसे उन्हें ऊपर उठा रही हो मैंने अपनी बाहे फैला कर उसे समेत लिया ,और बहुत देर तक उसे सीने से लगाये रही,उसके सर और माथे पर बहुत सारा प्यार किया वह चुपचाप खडी रही फिर उसमे कुछ हलचल हुई और मैंने उसे धीरे से छोड़ दिया । उसने मेरी और देखा उसकी आँखे अब चमक रही थी उसने कहा मम मेरा games period है bye,और वह चली गयी

12 comments:

  1. ऐसी मार्मिक .... ओह , आँख भर आये ,
    आज कल मनुष्य की आत्मा तो होश सँभालते ही मर जाया करती है,
    सिर्फ जिन्दा जिस्म को ढोए फिरते है . लेखिका की अहम् भूमिका पर
    दिल को शुकून मिला , जज़्बात एवं इंसानियत ना हो तो वह जीवन कैसा ?
    यशी ने बचपन में ही वह सब झेल लिया जो उसे एक दृढ और मजबूत इरादों वाली बनाएगी .
    मेरी शुभकामना है उसके साथ , लेखिका द्वारा सहज प्रस्तुति सराहनीय है .

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  2. बहुत ही मार्मिक ......मानवी गुण के नाते आँखे नम होना लाज़मी था ...यशी का जीवन खुशियों से भरा हो .....ये हमारी शुभकामनये है .

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  3. अच्छी पोस्ट है।

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  4. यशी के बारे में जाक्नकर बहुत दुख: हुआ। भावुक हो रहा हूं। आगे शब्द नहीं मिल रहे।

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  5. आंखें नम हैं, मन द्रवित। इतनी भावपूर्ण प्रस्‍तुति के लिए आपको साधुवाद। किसी भी यशी के साथ ऐसा ना हो।

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  6. बहुत ही भावुक प्रस्तुति, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  7. बहुत हि मार्मिक प्रस्तुती... रुला गई याशी और आप भी कविता जी... लेकिन अच्छी बात येह है कि याशी को आप जैसी शिक्षिका मिली है अन्यथा याशी का क्या होती.. शायद अंदर ही अंदर घुटी रह जाती... अंत में मुझे य्शी थोडा आशा कि किरण दिख रही है ... आप य्शी का खयाल राखीयेगा... हमारी शुभ्काम्नाये ...

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  8. Yashi ek marmik katha hai, ek chhoti si bachhi ki, jo apne kade anubhavo ke karan bachpan me hi samjhdar ho gayi, per bachpan to gaya .

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  9. कविताजी , आज ब्लॉग पड़ा .ऑंखें भर आई. यूँ तो यह बहुत सामान्य है . होता रहता है पर यशी की भावना को कौन समझे और कैसे ? आपने जो कुछ सुख उसको दिया वो उसकी अमानत है . काश सभी यशी को आपके जैसी मम मिले.
    Dr. Kamal Hetawal
    kamalhetawal@yahoo.co.in
    kamalhetawal@gmail.com

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  10. hello mam, aapka bjog pada, bahut hi mammik aur hridaysparshi likhti hai aap. hakikat se ru-bru aapka lekh....man ko bha gaya.

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