ओह ये यादें भी पीछा नहीं छोडतीं
sangeeta ji bahut abhar ...
बेहतरीन। सादर
कविता जी ! इस याद को बार - बार पढ़ा और मन में एक हलचल सी रही ! बंद कपाट , महक और वर्षों पहले , सब कुछ उद्वेलित कर दे रहा है !
BEHTARIN
अच्छी कविता,बहुत सुंदर।
बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........
बेहतरीन अभिव्यक्ति ..
वाह बेहतरीन अभिव्यक्ति ....
यादों की ख़ुश्बू...
भावपूर्ण रचना।
बहुत बढ़िया...
यादों की महक...बहुत सुन्दर..
यादो का सुहाना सफर
बेहतरीन !यादों की ये महक जीवन भर उस कसक को बनाए रखती है।
बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति
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म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...
ओह ये यादें भी पीछा नहीं छोडतीं
ReplyDeletesangeeta ji bahut abhar ...
Deleteबेहतरीन।
ReplyDeleteसादर
कविता जी ! इस याद को बार - बार पढ़ा और मन में एक हलचल सी रही ! बंद कपाट , महक और वर्षों पहले , सब कुछ उद्वेलित कर दे रहा है !
ReplyDeleteBEHTARIN
ReplyDeleteअच्छी कविता,
ReplyDeleteबहुत सुंदर।
बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........
ReplyDeleteबेहतरीन अभिव्यक्ति ..
ReplyDeleteवाह बेहतरीन अभिव्यक्ति ....
ReplyDeleteयादों की ख़ुश्बू...
ReplyDeleteभावपूर्ण रचना।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया...
ReplyDeleteयादों की महक...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर..
यादो का सुहाना सफर
ReplyDeleteबेहतरीन !
ReplyDeleteयादों की ये महक जीवन भर उस कसक को बनाए रखती है।
बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति
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