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Sunday, November 27, 2011

डर २

जैसे जैसे रास्ता सुनसान होता गया में ओर अधिक चौकन्नी हो कर बैठ गयी.मोबाइल हाथ में ले लिया ओर साइड मिरर से उस लड़की पर नज़र रखे हुए थी. हे भगवन बस ठीक से पहुँच जाएँ .अचानक गाड़ी के सामने एक कुत्ता आ गया गाड़ी में ब्रेक लगते ही में मेरे नकारात्मक विचारों को भी विराम मिला.मन ने खुद को धिक्कारा,छि ये क्या सोच रही हूँ  में, ११ साल पहले जब हम इस कोलोनी में रहने आये थे तब कितनी ही बार इसी सड़क  पर कितनी ही रात गए लोगो को लिफ्ट दी है.अगर कोई लिफ्ट न भी मांगे तो भी उसके पास गाड़ी रोक कर पूछ लेते थे कहाँ जाना है किसके घर जाना है आइये गाड़ी में बैठ जाइये हम भी उसी ओर जा रहे है. ओर आज एक लड़की से इतना डर.दुनिया इतनी भी बुरी नहीं है फिर कर भला हो भला का ये विश्वास आज डगमगा क्यों रहा है?लेकिन....मन यूं ही तो हार नहीं मानता ,जब उसके डर पर प्रहार होता है तो उसके अपने तर्क शुरू हो जाते है.संभल कर चलना ओर दूसरों की गलतियों से सीख लेना कोई बुरी बात तो नहीं है.फिर रोज़ इतनी ख़बरें पढ़ते है दूसरों को कोसते है आज जान बूझ कर खुद को मुसीबत में फंसा देना कहाँ की अकलमंदी है? फिर इस लड़की ने शराब पी रखी है भले वह भले घर की हो,लेकिन शराब के शौक पूरे करने के लिए तो माता पिता पैसे नहीं भेजते होंगे न?चेन खींचने की घटनाओं में अधिकतर कॉलेज  जाने वाले लडके ही पकड़ाते है.जब घर से भेजे पैसे में खर्चे पूरे नहीं होते तो ये शोर्ट कट अपना लेते है. 
अब तक हम तीनों ही खामोश बैठे थे. पतिदेव गाड़ी चला रहे थे ,में विचारों के झंझावत  में फंसी थी ओर वह...पिछली सीट के अँधेरे में में देख नहीं पाई की वह क्या कर रही है या उसके क्या हाव भाव है. लेकिन मुझे लगा शायद वह कुछ सोच रही है,या शायद वह इतने नशे में है की कुछ सोच ही नहीं पा रही है. 
टेक्सी स्टैंड आने को था तभी उसने अपनी चुप्पी तोड़ी अंकल प्लीज आप मुझे कही छोड़ दीजिये .शायद उसे भी अब  रात गए अकेले टेक्सी से जाने में डर लग रहा था. 
मैंने उससे कहा बेटा हमें पास ही कहीं कुछ काम है तुम टेक्सी से चली जाओ वो तुम्हे घर तक छोड़ देगा.तब तक हम चौराहे पर आ गए थे.
उसकी कातरता देख कर एक मन तो हुआ की उसे उसके घर तक छोड़ दिया जाये. लेकिन उसका घर कम से कम १० किलोमीटर दूर तो था ही ओर वह स्थान भी सुनसान था.
टेक्सी स्टैंड पर गाड़ी रुकते ही वह उतर गयी.लेकिन मैंने उसका पता पूछा टेक्सी वाले को समझाया ओर उससे कहा भैया इसे ठीक से इसके घर पहुंचा देना. उसकी चिंता भी हो रही थी.अजीब उलझन थी. टेक्सी वाला भी भला आदमी लगा उसने पता समझ कर मुझे आश्वस्त किया की वह जगह मुझे पता है में भी उसी इलाके में रहता हु आप चिंता न करें में इन्हें  छोड़ दूंगा .
मैंने उससे कहा -जाओ बेटा आराम से चली जाओगी.वह गाड़ी के बिलकुल करीब आ गयी मेरा हाथ खिड़की पर रखा हुआ था ,मेरा हाथ पकड़ कर वह रो पड़ी.थेंक्यु  आंटी  आई ऍम सॉरी मैंने आपको  बहुत परेशान किया  आंटी मेरी शादी हो गयी है ये देखिये.उसने कुरते में दबा हुआ उसका मंगलसूत्र बाहर निकाला,मेरा अपने हसबंड से झगडा हो गया था सॉरी आंटी  मैंने शराब पी हुई है .आप बहुत अच्छी है आंटी आपने मेरी इतनी मदद की.तभी मेरे पतिदेव भी वहां आ गए.वह उनकी ओर मुखातिब हुई अंकल प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आपको बहुत तकलीफ दी. 
बेटा अगर आपकी कोई परेशानी है तो आप अपने माता पिता को क्यों नहीं बताती?
आंटी वो मुझसे बहुत नाराज़ है.में उन्हें नहीं बता सकती. 
नहीं ऐसा नहीं है,वो चाहे कितने भी नाराज़ है, है तो माता पिता ,उनसे ज्यादा आपका भला ओर कोई नहीं सोच सकता. ओर फिर इस तरह अकेले रह कर शराब पी कर खुद को परेशानी में डालने से तो कोई हल नहीं निकालने वाला .तुम मेरी बेटी जैसी हो तुम्हे इस तरह शराब के नशे में देख कर दुःख हो रहा है.बेटा कोई भी परेशानी हो अपने माता पिता को जरूर बताओ.हो सकता है वो गुस्से में तुम्हे डांट दे शायद दो थप्पड़ भी लगा दे लेकिन फिर भी वो तुम्हारी परेशानी को दूर करने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेंगे. वह मेरा हाथ पकडे हुए थी मैंने उसे गले लगा लिया. उस २० मिनिट के असमंजस के बाद   मात्र ३ मिनिट में उसके साथ एक ऐसा सम्बन्ध सा बन गया ऐसी आत्मीयता हो गयी,उसका अकेलापन महसूस कर के बहुत दुःख हो रहा था.मुझे नहीं पता था की उसकी असली परेशानी क्या थी?मुझे नहीं लगता की जान कर भी में उस परेशानी को हल करने के लिए कुछ कर सकती थी ,लेकिन अब मुझे अफ़सोस हो रहा था.काश में उसे उसके घर तक छोड़ देती उससे कुछ बात कर लेती वह बहुत अकेली थी शायद उसका मन कुछ हल्का हो जाता,ओर उसके बाद वह खुद ही कोई हल ढूंढ लेती. 
टेक्सी वाला इंतजार में खड़ा था,मुझे हॉस्पिटल  जाने में देर  हो रही थी आज मेरा डर मुझे एक अकेली लड़की की मदद करने से रोक चुका था.वह टेक्सी में बैठ कर चली गयी. में ओर पतिदेव गाड़ी में दो मिनिट ऐसे ही बैठे रहे..मेरा डर भाग   चुका  था,लेकिन उसकी जगह एक खाली पन था पिछली  सीट के खालीपन से भी ज्यादा खालीपन लेकिन क्षणिक में ही  एक अफ़सोस ने वह जगह भर ली थी जो हमेशा हमेशा रहेगा..काश में अपने डर पर काबू पा लेती. 

Friday, November 25, 2011

डर

पता नहीं कैसे कैसे बेवकूफ लोग है??अख़बार नहीं पढ़ते या पढ़ कर भी समझते नहीं है,या समझ कर भी भूल जाते है ओर हर बार एक ही तरह से बेवकूफ बनते जाते है.टेबल पर अख़बार पटकते हुए पतिदेव झल्लाए .
ऐसा क्या हुआ ?चाय के कप समेटते हुए मैंने पूछा .
होना क्या है फिर किसी बुजुर्ग महिला को कुछ लोगो ने लूट लिया ये कह कर की आगे खून हो गया है मांजी अपने गहने उतार दीजिये .अरे खून  होने से गहने उतारने  का क्या सम्बन्ध है.ओर खून तो हो चुका उसके बाद ख़ूनी वहां खड़े थोड़ी होंगे. लेकिन पता नहीं क्यों लोग लोजिकली सोचते ही नहीं है. बस आ गए बातों में ओर गहने उतार कर दे दिए. 
अरे तो वो बूढी महिलाओं को निशाना बनाते है .घबरा जाती है बेचारी.नहीं समझ पाती, आ जाती है झांसे में.
अरे बूढी नहीं अब ५० -५५ साल की कामकाजी महिलाएं ओर उनमे भी कई तो अच्छी पोस्ट पर भी है. कैसे नहीं समझ पाती. समझ नहीं आता. ओर खैर मान लिया महिलाएं है लेकिन  कितने ही आदमी भी तो ठगे जाते है,लड़कियाँ लिफ्ट लेती है ओर सुनसान रास्ते पर गाड़ी रुकवा कर लूट लेती है.जब पता है की आपके रास्ते सुनसान है तो क्यों देते है लोग लिफ्ट ? 
अब बेचारे नहीं मना कर पाते लड़कियों को मदद करने से..क्या करें,मैंने हँसते हुए कहा. 
हाँ  जी तुम्हे तो मौका मिल गया न हम मर्दों को कोसने का. हम तो बस...
अरे आप इतना नाराज़ क्यों होते है अब शायद परिस्थितियां ऐसी होती होंगी इंसानियत भी तो कोई चीज़ है. फिर किसी के माथे पर थोड़े  लिखा है की जिसकी मदद कर रहे है वो धोखेबाज है. चलिए अब नहा लीजिये ओफ़िसे के लिए देर हो जाएगी. मैंने बात ख़त्म करते हुए कहा. 
वैसे बात तो सही है,रोज़ तो एक जैसी घटनाएँ होती है ,पैदल चलती महिलायों की चेन खींचना मोबाइल छुड़ा लेना गहने उतरवा लेना,लिफ्ट ले कर लूट लेना. लेकिन पता नहीं क्यों लोग सीख ही नहीं लेते. 

देर हो रही है जल्दी चलिए न हॉस्पिटल दूर है.किसी को देखने जाना हो ओर वो भी इतनी देर से. ठीक नहीं लगता. फिर लोटने में भी तो देर हो जाएगी.मैंने हड़बड़ी मचाते हुए कहा .
हाँ भाई चलो अभी बहुत देर भी नहीं हुई है,पतिदेव ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा .
घर से थोड़े ही दूर मोड़ पर एक लड़की खडी थी.लगभग गाड़ी के सामने ही खड़े हो कर उसने हाथ दिया तो गाड़ी रोकना ही पड़ी.
अंकल प्लीज  मेरी मदद कीजिये प्लीज मेरी गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही है. 
सड़क के किनारे एक कार खडी थी ऐसा लगा की कच्ची सड़क की गीली मिटटी में फंस गयी है. अब मना तो किया नहीं जा सकता था.सो पतिदेव तुरंत गाड़ी से उतर गए ओर उसकी गाड़ी में बैठ कर गाड़ी स्टार्ट कर दी. गाड़ी निकालने की बड़ी कोशिश की लेकिन ये क्या गाड़ी तो हिली ही नहीं फिर गाड़ी रिवर्स की तो हो गयी लेकिन आगे लेने पर एक इंच भी नहीं हिली. अब तक में भी गाड़ी से नीचे उतर आयी.इस सुनसान रास्ते पर एक अकेली लड़की की मदद करने का एहसास सुखद था.  वह लड़की भी मेरे पास आ कर खडी हो गयी.ओर उसके साथ आया शराब की गंध का जोरदार भभका. में दो कदम पीछे हट गयी.
ओह इसने तो शराब पी रखी है.लगता है नशे में गाड़ी कहीं ठोंक दी. अब मैंने गाड़ी को ध्यान से देखा तो पता चला की गाड़ी का अगला हिस्सा दबा हुआ है जिसकी वजह से पहिया आगे को नहीं घूम पा रहा है. तभी एक गाड़ी वहां से निकली लेकिन हमारी गाड़ी तो बीच रास्ते में खडी थी. खैर गाड़ी को साइड में कर के में फिर जल्दी से बाहर आ गयी.तब तक पतिदेव भी गाड़ी से बाहर आ गए थे. 
कहाँ रहती हो?कहाँ जाना है? मैंने पूछा. अब ये गाड़ी कहीं नहीं जा सकती बिना मेकेनिक  के ये तो तय था. समय निकाला जा रहा था .हमें हॉस्पिटल जाना है ये कहाँ की मुसीबत में फंस गए. मैंने मन ही मन सोचा. 
अंकल प्लीज़ कुछ करिए न ,मुझे मूसाखेड़ी जाना है मेरी गाड़ी को पता नहीं क्या हो गया है. प्लीज़ अंकल. 
लेकिन तुम यहाँ आयी किसके घर हो ?मूसाखेड़ी तो बहुत दूर है यहाँ से .
आंटी में अपनी एक सहेली के यहाँ आयी थी वो यहीं इसी कालोनी  में रहती है .
तो तुम अपनी उसी सहेली के यहाँ चली जाओ.गाड़ी लोक कर दो .सुबह किसी मेकेनिक को फोन कर के बुला लेना वो गाड़ी ले जायेगा.मैंने किसी तरह पीछा छुड़ाने की गरज से कहा. 
आंटी मेरा उस सहेली से झगडा हो गया है.अब में उसके घर नहीं जा सकती .आप लोग कहाँ जा रहे है??आंटी प्लीज़ मुझे लिफ्ट दे दीजिये.प्लीज़ आंटी .
कहाँ रहती है तुम्हारी सहेली? 
उसने दूर एक घर की तरफ इशारा कर दिया.
हे भगवन इस मकान में ,इसमें तो न जाने ....उस मकान के बारे में कई किससे सुन रखे थे ये वहां से आ रही है .
बेटा सहेलियों में झगडा तो होता रहता है लेकिन वो सहेली है तुम्हे परेशानी में देख कर जरूर मदद करेगी .मैंने फिर कोशिश की .
आंटी में अच्छे घर से हूँ मेरे पापा बहुत अच्छी पोस्ट पर है.प्लीज़ आंटी मेरी मदद करिए .में यहाँ से कैसे जाउंगी ??
तुम्हारे घर से किसी को बुला लो वो आ कर तुम्हे ले जायेंगे ओर गाड़ी का भी कुछ इंतजाम कर देंगे. में  हर तरह से इस बिन बुलाई मुसीबत से पीछा छुड़ाना चाहती थी. 
आंटी में होस्टल में रहती हूँ. यहाँ कोई फॅमिली मेंबर नहीं है. 
आप कहाँ तक जा रहे है मुझे किसी टेक्सी  स्टैंड तक छोड़ दीजिये प्लीज़. 
हे भगवन ये क्या वही हुआ जिसका डर था. कालोनी के बाहर सुनसान रास्ता ,रात का समय एक अकेली लड़की को लिफ्ट देना ,अख़बार में पढ़ी ख़बरें ,जानबूझ कर बेवकूफ बनना बहुत सारी बातें दिमाग में घूम गयीं. 
दिल तो मेरा भी पिघलने लगा .ये लड़की रात के इस समय इस जंगल में ( हमारी कालोनी रात में जंगल सा आभास कराती है) अकेले कैसे कहीं जाएगी. लेकिन सुनसान रास्ते पर उसे गाड़ी में बैठा कर ले जाना भी तो खतरे से खाली नहीं है.कहीं कुछ हो गया तो??घर में बच्चे इंतजार कर रहे है. लेकिन अगर इसे अकेले यहाँ छोड़ दिया तो ?नहीं नहीं ये तो कोई बात नहीं की अपने डर की वजह से किसी अकेली लड़की की मदद न की जाये. लेकिन कहीं लेने के देने पड़ गए तो?ऐसे तो बड़ी होशियारी दिखाते है .मैंने मदद के लिए पतिदेव की ओर देखा.वैसे पता था वहां तो मदद का जज्बा ज्यादा ही जोर मार रहा होगा. लेकिन हॉस्पिटल के लिए देर हो रही है. 
देखो बेटा हमें तो यही पास में जाना है लेकिन हम तुम्हे पास के टेक्सी स्टैंड पर छोड़ सकते है .लेकिन तुम्हारी गाड़ी?
अब उसने मेरे पतिदेव की तरफ देखा. 
गाड़ी तो यहाँ से हिल भी नहीं पायेगी.ऐसा करो यहीं लोक  कर दो हम तुम्हे पास के टेक्सी स्टैंड तक छोड़ देते है. 
गाड़ी ठीक से लगा कर लोक की उसे हमारी गाड़ी में बैठाया .पूरी गाड़ी शराब की गंध से भर गयी.महक इतनी तेज़ थी की शीशे खोलने पड़े.मैंने पतिदेव की तरफ देखा.समझ तो वह भी रहे थे लेकिन बिना मदद किये वहां से आगे बढ़ जाना ठीक भी नहीं लग रहा था. 
गाड़ी ने कालोनी का रास्ता तय कर मोड़ लिया ओर बिलकुल सुनसान रास्ता शुरू हो गया इसी के साथ मेरे दिल की धड़कने भी तेज़ हो गयी. हे भगवन यहाँ अगर २-४ लोग सड़क पर खड़े हो कर रास्ता रोक ले तो कुछ किया भी नहीं जा सकता. उनपर गाड़ी तो कम से कम नहीं चढ़ाई जा सकती. पता नहीं हम सही कर रहे है या नहीं?.क्रमश 

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