Followers

Thursday, December 22, 2011

मातृत्व


ब्लॉग जगत में आये मुझे लगभग ढाई साल हो गए है.इस समय में जो भी लिखा वो आप सभी लोगो ने सराहा.जिससे मुझे ओर लिखने की हिम्मत मिली .बीच बीच में कुछ रुकावटें भी आयी जिससे लिखना कम हुआ लेकिन लिखने का शौक ओर आपका प्रोत्साहन मुझे फिर यहाँ खींच लाया. आज में अपनी १०० वीं पोस्ट डाल रही हूँ.आशा है आप लोगो को पसंद आएगी . 

रामदे से आती सिसकी की आवाज़ सुन कर स्नेहा का दिल बिंध सा गया .उसकी जेठानी की बेटी पिंकी को शायद आज फिर डांट पड़ी.
पता नहीं भाभी कैसे फूल सी बच्ची से ऐसा व्यव्हार कर पाती है. पिंकी उनकी दूसरी बेटी है.उसके जन्म के समय सभी को बेटे की आस थी इसलिए उसे वह प्यार कभी नहीं मिला जिसकी वह हकदार है. 
भाभी जब भी पिंकी को बेवजह डांटती स्नेहा का दिल तड़प उठता .निस्संतान स्नेहा का मातृत्व एक किलकारी के लिए खून के आंसू बहता .
उसने पिंकी को चुपके से अपने कमरे में बुलाकर सीने से लगा लिया.
आज फिर भाभी का अवसाद पिंकी पर ज्वाला बन फूट पड़ा. उन्होंने पिंकी को चार -पांच तमाचे भी जड़ दिए. गुस्से में शब्द अंगारे बन कर बरस रहे थे. स्नेहा से रहा न गया .वह कमरे से बाहर निकली ओर भाभी के हाथ से पिंकी को छुड़ा कर अपने सीने से लगा लिया ओर रोते हुए बोली बस करो भाभी ये बेटी बन कर पैदा हुई इसमें इसका क्या कुसूर है अगर आपको इससे कोई लगाव नहीं है तो इसे मेरी झोली में डाल दो लेकिन इस मासूम से इतनी नफरत तो न करो. 
नफरत?? भाभी जैसे अचानक होश में आयीं में अपनी बेटी से नफरत करूंगी?
लेकिन भाभी प्यार भी तो नहीं करती न?
पिंकी स्नेहा के पैरों को अपने नन्हे हाथों से घेरे सिसक रही थी. 
भाभी ने पिंकी को खींच कर अपने  सीने से लगा लिया .उसका चेहरा चुम्बनों से भर दिया .बेटी को खुद से अलग कर देने के ख्याल से ही उनका मातृत्व तड़प उठा. बेटे की चाह में अपनी ही बेटी के साथ किये अन्याय को महसूस कर उनका मन ग्लानी से भर गया. 
स्नेहा ने सुकून की साँस ली. उसका मातृत्व संतुष्ट था . एक बच्ची को उसकी माँ का प्यार जो मिल गया . 

22 comments:

  1. बहुत सुन्दर सीख देती लघुकथा…………100 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  2. बहुत ही रोचक और प्रभावी प्रस्तुति ....

    ReplyDelete
  3. kavita ji shatak ke liye badhyee...sarthak lekhan ki apeksha rahegi hamesha aapse ,sunder lekhan ho tumhara sunder man.....

    ReplyDelete
  4. माँ के प्यार में निस्वार्थ भाव को समेटती पोस्ट....

    ReplyDelete
  5. वाह ..
    अच्‍छी लघु कथा ..
    100वें पोसट की बधाई !!

    ReplyDelete
  6. बहुत प्रभावी और रोचक लघु कथा..

    ReplyDelete
  7. बहुत रोचक व् मन को प्रभावित करती कथा .......इसी तरह लिखते रहिये .......१०० वीं पोस्ट के लिए बधाई !!!!!!!!!!!!!!!

    ReplyDelete
  8. बहुत अच्छी लघुकथा…100 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई...

    ReplyDelete
  9. 100 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाईयां एवं शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  10. प्रभावी और रोचक लघुकथा.

    ReplyDelete
  11. बहुत प्रभावी और रोचक लघुकथा...१००वें पोस्ट की बधाई!

    ReplyDelete
  12. 100वीं पोस्ट के लिये बहुत बहुत बधाई
    बहुत बढ़िया लघुकथा

    ReplyDelete
  13. भावनाओं का सुंदर प्रस्‍तुतिकरण।

    बढिया पोस्‍ट।

    ReplyDelete
  14. bahut acchi or prabhavi rachana hai.....
    100vi post ki hardik badhhayi....

    ReplyDelete
  15. भावमय करते शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    ReplyDelete
  16. अच्छी लघुकथा…100 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई...

    ReplyDelete
  17. बहुत बहुत शुभकामनाएं।
    आपकी सौवीं पोस्ट समाज की एक कडवी सच्चाई को आइना दिॆखा रही है।
    ऐसे पोस्ट समाज को एक रास्ता दिखाने का काम करती है।
    बहुत बढिया

    ReplyDelete
  18. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-737:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    ReplyDelete
  19. अच्छी पोस्ट। सौवीं पोस्ट की बधाई।

    ReplyDelete
  20. सौवीं पोस्ट की बधाई

    ReplyDelete
  21. bahut badhiya rachna.......
    bahut saari shubhkamnayain ....
    mere blog se judne ke liye click karain...
    http://dilkikashmakash.blogspot.com/

    ReplyDelete
  22. Ek Achhi Kahani Ka Prastutikaran Aapke Dwara. Thank You For Sharing.

    प्यार की कहानी

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियाँ हमारा उत्साह बढाती है।
सार्थक टिप्पणियों का सदा स्वागत रहेगा॥

हिन्दी में लिखिए

image

चेतावनी

"कासे कहूँ?"ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री को किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं।

image

ब्लॉग4वार्ता पर आएं

ब्लॉग4वार्ता हिन्दी चिट्ठों का अनवरत प्रकाशित एक मात्र संकलक है। जहाँ आपको एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों के उम्दा एवं बेहतरीन चिट्ठे पढने को मिलेगें। आपका हार्दिक स्वागत है।