Followers

Tuesday, October 27, 2009

युवा पीढी के बारे में एक विचार

kabhi-kabhi sochati hu kya hamari yuva peedi aalsi ho gayee hai?kya unme apane se bado ke liye samman ki bhavana khatm ho rahi hai?kuchh aise hi udaharano se aaye din do-char hoti hu,ek library mein kuchh ladakiyan khadi hai ,unhe upar vale shelf se kuchh pustake chahiye.vo intazar karti hai library assistent ka .par vo vyast hai ,unki madam aa kar poochhati hai koun si pustak chahiye?aur vo upar ke shelf ki aur ishara kar deti hai. madam table par chad kar pustak nikalati hai ,par un ladakiyon ko koi shikan nahi hoti.isi tarah ke udaharano se rozana hi do-char hoti hu.lagata hai aaj ki yuva peedi bahut practical ho gayee hai.badon ke liye samman hai par vo unki jarurat ke hisab se ghatata badata hai.jisse jaroorat padane vaali ho uska bhar- poor samman karo aur jab jaroorat nikal jaye chuppi saadh lo.aaj kal ke bachche samay se pahale hi duniyadari seekh rahe hai.unme naisargik bholapan khatm ho raha hai. iske liye kai karan jimmedar hai,doosron ko kya dosh de shayad hum hi unhe uchit mahol nahi de paa rahe hai.par jo bhi ho in karno par vichar karna hi hoga taki isi yuva peedi ko ek swasth samaj diya ja sake.
kavita

Monday, October 19, 2009

निदान


ऊउउऊ ............ मोनू के रोने की आवाज़ सुन कर सुनीति चोंक गयी.क्या हुआ बेटा ?
मम्मा दादी ने सोनू को ज्यादा जामुन दी मुझे कम दी .दादी हमेशा ऐसा ही करती है। सोनू को हर चीज ज्यादा देती है। मोनू की आवाज़ में दिल को छलनी कर देने वाली कातरता थी। नहीं  बेटा ऐसा नही है दादी सबको बराबर देती है तुम्हे ऐसा लगा होगा । दादी तो मोनू को भी बहुत प्यार करती है,कहते-कहते सुनीति ख़ुद ही सकपका गयी। अब पाँच साल के बच्चे को क्या समझाए वो भी जानती है मोनू झूठ नही बोल रहा है। अगले महीने राखी है दोनों ननद आने वाली हैं। मांजी की इच्छा है इस बार उन्हें पूरे कपडे करने के साथ ही सोने के कंगन भी दिए जाए.जेठजी अच्छी कंपनी में ऊँचे पद पर हैं उनके लिए कुछ हजारों का खर्चा निकलना कुछ ज्यादा मुश्किल नही है,पर पति की नौकरी में इस समय कुछ भी ठीक नही चल रहा है ,ऐसे में ये खर्च .परसों ही सुबोध ने मांजी  से पैसे का इंतजाम न होने की बात की थी तभी से उनका मूड उखडा हुआ है । 
मोनू रोते-रोते सो गया,उसे चादर उड़ाते  हुए सुनीति ने अपनी आंखों की कोरे पोंछी,और काम में लग गयी।
शाम को सुबोध ऑफिस से आए तो सोनू को सोते देख कर पूछा ये अभी क्यों सो रहा है ?
खेलते-खेलते थक गया था । 
वो पति की परेशानी और नही बढ़ाना चाहती थी,लेकिन  मोनू के गालों पर सूखे आंसुओं के निशान सुबोध की नज़रों से छुप न सके .में अभी आता हूँ कह कर वो घर से निकल गए. 
रात में सुबोध ने उसके हाथ में दस हज़ार रुपये रखे तो वह चौंक पड़ी । मैंने दिनेश से उधार ले लिए कल मांजी को दे दूंगा.कहते हुए उन्होंने मोनू के सर पर हाथ फेर कर उसका माथा चूम लिया।
कविता वर्मा

हिन्दी में लिखिए

image

चेतावनी

"कासे कहूँ?"ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री को किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं।

image

ब्लॉग4वार्ता पर आएं

ब्लॉग4वार्ता हिन्दी चिट्ठों का अनवरत प्रकाशित एक मात्र संकलक है। जहाँ आपको एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों के उम्दा एवं बेहतरीन चिट्ठे पढने को मिलेगें। आपका हार्दिक स्वागत है।