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Wednesday, March 1, 2017

वीरान महफ़िल

वीरान महफ़िल 
बहुत रौनक थी उस पार्टी में बहत्तर तरह के भोज्य पदार्थ सुरा की नदियाँ खिलखिलाते कीमती कपड़ों की नुमाइश करते बड़े बूढ़े और जवान खूबसूरत चेहरे बातों ठहाकों से गूंजता माहौल और नेपथ्य में मधुर संगीत की स्वर लहरियाँ। 
पार्टी के होस्ट शिवराज जी कीमती साड़ी और लकदक जेवरों से सजी अपनी खूबसूरत पत्नी शालू की कमर में हाथ डाले गर्मजोशी से मेहमानों का स्वागत कर रहे थे। शालू भी तो अपनी मधुर मुस्कान और आत्मीयता से सबकी बधाइयाँ स्वीकार कर शादी के पच्चीसवीं सालगिरह की इस पार्टी को पूरी तरह सफल बनाने के लिए हर एक का ध्यान रख रही थीं। 
बहुत खुश थी शालू कि आज शिवराज उनके साथ हैं। सभी मेहमानों के सामने घुटनों के बल बैठ कर जब उन्होंने शालू से फिर शादी की रजामंदी मांगी तो वह किसी नवयौवना सी शर्मा गई। आज कोई भी उसकी किस्मत पर रश्क कर सकता था। 
खाने पीने के बाद मेहमान एक एक कर जाने लगे महफ़िल खाली होने लगी। शिवराज अब तक नशे में धुत्त हो चुके थे शालू बड़ी मुश्किल से उन्हें बैडरूम तक लाई। बिस्तर पर लिटा कर उनके जूते उतारने लगी तभी शिवराज नींद और नशे में बड़बड़ाये निशा डार्लिंग आय लव यू। 
कविता वर्मा

3 comments:

  1. हाहाहा १ बढ़िया.

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’झूठ के लिए सच को दबाने का शोर - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. दोगले इंसान नशे में सच्ची बात कह लेते हैं

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