Tuesday, April 29, 2014

'परछाइयों के उजाले' का विमोचन

मेरे कहानी संग्रह 'परछाइयों के उजाले' का विमोचन वरिष्ठ चर्चाकार श्रीं जीवन सिंह ठाकुर और रंगकर्मी श्री ओम द्विवेदी के हाथों सम्पन्न हुआ। 



Monday, April 21, 2014

"परछाइयों के उजाले " का लोकार्पण

मेरी पुस्तक "परछाइयों के उजाले " का लोकार्पण


Friday, April 18, 2014

बातें-कुछ दिल की, कुछ जग की: “परछाइयों के उजाले” – आईना ज़िंदगी का

बातें-कुछ दिल की, कुछ जग की: “परछाइयों के उजाले” – आईना ज़िंदगी का: कविता वर्मा जी के कहानी लेखन से पहले से ही परिचय है और उनकी लिखी कहानियां सदैव प्रभावित करती रही हैं. उनका पहला कहानी संग्रह “परछाइयों क...

Tuesday, April 8, 2014

"परछाइयों के उजाले " प्रतिक्रिया

मेरे प्रथम कहानी संग्रह "परछा इयों के उजाले " पर "बेअदब साँसे "के रचयिता श्री राहुल वर्मा जी कि प्रतिक्रिया अभी अभी प्राप्त हुई जिसे मैं आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ।


Thursday, February 27, 2014

पीड़ा


कहाँ थीं तुम सारी रात ?जलते हुए प्रश्न में किसी अनहोनी की चिंता के स्थान पर अविश्वास की छाया पा कर सुराली के कदम एक पल को ठिठके। मन में क्षोभ उत्पन्न हुआ बीस बरस के साथ का विश्वास एक रात में चुक गया। मन हुआ एक तीखा सा उत्तर दे लेकिन फिर खुद को रोक लिया और अंदर चली गयी। 
अविश्वास की जिस कटार से उसका दिल छलनी हुआ है जवाब ना मिलने से उपजी आशंका की पीड़ा उसे भी तो झेलने दो ,फिर तो अभी भाई आ कर बता ही देंगे कि माँ के पास हॉस्पिटल में थी वह सारी रात।
कविता वर्मा 



Wednesday, February 19, 2014

भास्कर मधुरिमा पेज़ २ पर मेरी कहानी 'शॉपिंग '…
http://epaper.bhaskar.com/magazine/madhurima/213/19022014/mpcg/1/

प्यार के दो बोल

 म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...