Showing posts with label तूफ़ान. Show all posts
Showing posts with label तूफ़ान. Show all posts

Wednesday, April 20, 2011

एतबार

अब जान कर भी कहाँ जान पाते हैं लोग?

हर मोड़ पर नए रूप में नज़र आते हैं लोग.


थामा जो तूने हाथ तो दिल को संबल मिला.

पर तूफ़ान में हाथ छोड़ दिया कैसा दिया सिला?


सोचा था कदम बहके तो थाम लोगे तुम.

पर हमसे पहले ही तुम बहकने क्यों लगे?


तुमसे था अपने होने का गुरुर हमको

एतबार यूँ टूटा खुद पे भरोसा कैसे करें?

प्यार के दो बोल

 म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...