अब जान कर भी कहाँ जान पाते हैं लोग?
हर मोड़ पर नए रूप में नज़र आते हैं लोग.
थामा जो तूने हाथ तो दिल को संबल मिला.
पर तूफ़ान में हाथ छोड़ दिया कैसा दिया सिला?
सोचा था कदम बहके तो थाम लोगे तुम.
पर हमसे पहले ही तुम बहकने क्यों लगे?
तुमसे था अपने होने का गुरुर हमको