गली के मुहाने पर
बंद सा एक मकान
अपनी खामोश उदासियों
में भीगा सा
जाने क्यूँ पुकारता रहा मुझे
बरसों पहले
उसके बंद कपाटों से
आती महक
तेरा जिक्र होते ही
फिर छा गयी .
म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...