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Thursday, January 19, 2012

याद


गली के मुहाने पर
 बंद सा एक मकान 
अपनी खामोश उदासियों 
में भीगा सा 
जाने क्यूँ पुकारता रहा मुझे 
बरसों पहले 
उसके बंद कपाटों से 
आती महक 
तेरा जिक्र होते ही 
फिर छा गयी .

प्यार के दो बोल

 म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...