उस पुरानी पेटी के तले में
बिछे अख़बार के नीचे
पीला पड़ चुका वह लिफाफा.
हर बरस अख़बार बदला
लेकिन बरसों बरस
वहीँ छुपा रखा रहा वह लिफाफा.
कभी जब मन होता है
बहुत उदास
कपड़ों कि तहों के नीचे
उंगलियाँ टटोलती हैं उसे
उसके होने का एहसास पा
मुंद जाती है आँखे
काँधे पर महसूस होता है
एक कोमल स्पर्श
कानों में गूंजती है एक आवाज़
में हूँ हमेशा तुम्हारे साथ
बंद कर पेटी
फिर छुपा दिया जाता है उसे
दिल कि अतल गहराइयों में
फिर कभी ना खोलने के लिए
उसमे लिखा रखा है
नाम पहले प्यार का.