Friday, April 13, 2018

मानसिकता बदलें

बात तो बहुत छोटी सी है और कोई नई बात भी नहीं है रोज होती है और सैंकड़ों हजारों के साथ होती है। फिर भी उसका जिक्र करना चाहती हूँ पूछना चाहती हूँ अपने सभी मित्रों से खास कर पुरुष मित्रों से। उम्मीद नहीं है कि आप यहां जवाब देंगे न भी दें लेकिन इस पर विचार तो करें। अपने आप में और अपने बेटों में इस तरह का व्यवहार देखें तो सजग हो जायें। समझें कि सोच में बदलाव की जरूरत है।

कल फेसबुक पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई प्रोफाइल ठीक ठाक थी सौ से ज्यादा म्यूचुअल फ्रेंड थे स्वीकार कर ली। आज जय हिंद संदेश आया। मैसेंजर पर मैसेज भेजने से मना किया। कहा फेसबुक पर पोस्ट हैं उस पर विचार व्यक्त करें।
ऐसा तो होता ही रहता है। लेकिन सिर्फ यही नहीं होता। आहत होता है एक पुरुष का अहं कोई महिला किसी बात से मना कैसे कर दे?
 जिस बात को वह सही मान रहे हैं उसे कोई महिला गलत कैसे कह रही है?
अगर दोस्ती की है तो उनकी मर्जी सर्वेसर्वा होना चाहिए महिला को पसंद नहीं है तो क्या फर्क पड़ता है? उसकी पसंद नापसंद के हमारे लिए कोई मायने नहीं हैं।
फेसबुक पर भी ना सुनने में जो पौरुष आहत हो जाता है शब्द बाण चला कर महिला को नीचा दिखाने की कोशिश करता है फिर अनफ्रेंड ब्लाक कर अपने अहं की तुष्टि करता है ऐसे पौरुष के साथ आम जिंदगी में बराबरी करती लडकियों महिलाओं के लिए कितनी बड़ी बड़ी मुसीबतें हैं।
कैसे मान लें फेसबुक के ये आहत पौरुष असल जिंदगी के भावी बलात्कारी नहीं होंगे।
हम दुखी होते रहेंगे बलात्कार की घटनाओं से सरकार से प्रशासन से जवाब मांगते रहेंगे अपनी बेटियों को सतर्क करते रहेंगे लेकिन जब तक पौरुष की सही परिभाषा नहीं समझी जायेगी बलात्कार होते रहेंगे।
कविता वर्मा

Saturday, April 7, 2018

इन्हें कौन दिशा देगा ?

बेटी तब 9 वीं में थी। शाहिद कपूर नया नया आया था और इस आयु वर्ग के सभी बच्चे उसके बड़े फैन थे।
बेटी की क्वार्टरली एक्जाम का रिजल्ट और काॅपी देखने स्कूल गई थी। इंग्लिश की काॅपी देख कर वह बड़ी मायूस हुई कि my hero पर लिखे उसके पैराग्राफ में सर ने बहुत कम नंबर दिये। वह चाहती थी कि मैं सर से इस बारे में बात करूं। मैं काॅपी लेकर सर के पास गई और उनसे पूछा कि आपने इस पैराग्राफ में नंबर दिये ही क्यों?  आपने इसे पूरा काट क्यों नहीं दिया? हीरो का मतलब क्या होता है किसे अपना हीरो अपना आदर्श बनाया जाना चाहिए यह भी आप नहीं समझा पाये बच्चों को। क्या किया है शाहिद कपूर ने देश के लिए?
सर और बिटिया के साथ वहाँ उपस्थित बाकी पैरंट्स भी सन्न थे लेकिन मैंने कहा कि आप बच्चों के मार्कस् की चिंता न करें बल्कि सही कंसेप्ट देने की चिंता करें। आपकी जगह मैं होती तो पूरे पेज पर ऊपर से नीचे तक कट लगा कर शून्य देती और अगली बार अगर ऐसे हीरो के बारे में लिखे मेरी बेटी तो आप उसे जीरो ही दें।
आज टीवी पर रोना बिसूरना और उसको भुनाना देख कर याद आया।
कविता वर्मा

#कोरोना_कथा1

 कोरोना के उस वार्ड में एक दो या शायद तीन दिन कैसे बीते सिलसिलेवार कुछ भी याद नहीं है। कुछ छुटपुट बेतरतीब सी बातें गाहे-बगाहे याद आती भी हैं...