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प्यार के दो बोल
म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...
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बात तो बचपन की ही है पर बचपन की उस दीवानगी की भी जिस की याद आते ही मुस्कान आ जाती है। ये तो याद नहीं उस ज़माने में फिल्मों का शौक कैसे और ...
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कल दो खबरे सुनी और पढ़ीं उनसे मन विचलित हो गया . एक घटना हमारे घर के पास ही हुई ,किसी के नए मकान का गृहप्रवेश था मेहमान खाना खा रहे थे त...
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कभी सोचती हूँ दिमाग जो होता एक डिबिया निकाल कर देखती उसमे पड़े विचार,भाव रिश्ते-नाते , यादें ,एहसास,घटनाएँ हौले से छूकर सहलाती संचेतना ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-04-2014) को ""फिर लौटोगे तुम यहाँ, लेकर रूप नवीन" (चर्चा मंच-1587) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'