.सूरज की सुनहरी धुप
छूती है जो गालों को
पर कुनकुनी नहीं लगती
कुछ सर्द सा है.
बारिश की रिमझिम बूँदें
पड़ती जो तन पर
पर मन को नहीं भिगोती
कुछ सूखा सा है.
भीड़ भरे बाज़ार में
चीखती आवाजें
कुछ सुनाई नहीं देता
कुछ सूना सा है.
दोस्ती प्रेम प्यार के
एहसासों से भरे जीवन में
नहीं होता कोई एहसास
कुछ रीता सा है.
एक तुम्हारा स्पर्श
एक तुम्हारी नज़र
जो मिल जाये मुझे
फिर सब अपना सा है.