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Tuesday, May 10, 2011

इंतजार १०

( मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ ?मधु से मिलकर उसे सारी बात बताने के बाद भी वह शांत थी ...उसके बाद वह फिर नहीं मिली मुझसे .आज मंदिर में मुलाकात हुई क्या ये मुलाकात आगे भी जारी रहेंगी ...३३ सालों बाद इन मुलाकातों का क्या स्वरुप होगा .. मधु से फिर मुलाकात हुई और आगे भी होती रही फिर....)अब आगे..

सुबह छः बजे मोबाईल बजा .पुष्पा का फ़ोन था,मधुसुदन जी मधु की मम्मी की तबियत अचानक ख़राब हो गयी है .हम उन्हें लेकर अस्पताल में है .
मैंने अस्पताल का नाम पता पूछा और तुरंत वहां पहुंचा. देखा चारों सहेलियां वहीँ थीं .
क्या हुआ?
सुबह ४ बजे उन्हें अस्थमा का अटेक आया. अभी आई सी यु में हैं आरती ने बताया .
तभी डॉक्टर ने बताया की उनकी हालत स्थिर है दो घंटे बाद वार्ड में शिफ्ट कर सकते हैं .
सबने राहत की सांस ली.
मधु ने पुष्पा और माला को कहा की अब तुम घर जाओ तुम्हे स्कूल जाना है आरती और मधुसुदन हैं यहाँ .
दोनों ने विरोध किया तो वह उन्हें प्यार से डपटते हुए बोली अरे!ऐसी जरूरतें तो पड़ती ही रहेंगी. तब हम सब को बारी बारी से छुट्टियाँ लेनी होगी. आज पांच छुट्टियाँ बिगाड़ने से क्या फायदा ? आरती के ऑफिस टाइम से पहले उसे भी भेज दूँगी उसके बैंक में ओडिट चल रहा है शाम को सब बारी बारी रहेंगे.
कितनी तैयार है मधु जिंदगी के हर उतार -चड़ाव के लिए. में बस देखता और सोचता ही रहा.
मम्मी को वार्ड में शिफ्ट कर दिया था. मधु ने आरती को भी भेज दिया था फिर मेरी ओर मुखातिब हुई .
न मुझसे जाने के लिए न कहना ,और हाँ मुझे छुट्टी नहीं लेनी पड़ती में यही से सब हेंडल करता रहूँगा फ़ोन है ना मैंने कहा .
मधु हंस दी.
दिन में केन्टीन में खाना खाते हुए मैंने मधु से पूछा तुम्हे डर नहीं लगता? किस बात का?हाथ का कोर हाथ में ही रखे उस ने मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा .
में कुछ नहीं बोला.
हंस दी मधु . डरना क्या है ये तो जिंदगी है .माँ की उम्र ७५ से ऊपर है .ये तो चलता ही रहेगा .
उस दिन मंदिर के बाद आज पहली बार में और मधु अकेले मिल रहे थे . में मधु से बहुत कुछ पूछना चाहता था पर पूछ ना सका.
मम्मी अब ठीक थीं डॉक्टर ने घर ले जाने की इजाज़त दे दी थी .
मधु ने मम्मी से मेरा परिचय करवाया .मेरा नाम सुनकर उनके चेहरे पर एक शिकन सी आयी. और उन्होंने मधु को प्रश्नवाचक दृष्टी से देखा .
मधु ने उनके कंधे को धीरे से दबाया और बोली -हाँ मम्मी ये मधुसुदन हैं शाहपुर से अभी यहाँ तबादला हो कर आये है .आज सुबह से यहीं है अस्पताल में .अब चले?
उन्होंने असमंजस की सी स्थिति में सर हिलाया और चलने लगीं में अपने आप में गढ़ सा गया.

घर आकर मम्मी की सब व्यवस्था करके मधु सोफे में धंस गयी और गहरी सांस लेकर आँख बंद कर ली .
दिन भर मम्मी की तबियत और इलाज की जो चिंता उसने किसी पर प्रकट नहीं होने दी थी अब सब ठीक होने के बाद उस चिंता को अपने अंदर कैद किये रखने की थकावट उसके चेहरे पर थी
मुझे लगा अब मुझे चलना चाहिए मधु को भी अब आराम की जरूरत है पर उसे आँखें बंद किये बैठे देख कर उसे जगाना मुझे अच्छा नहीं लगा .
में यूं ही कमरे का मुआयना करने लगा .
एक छोटा सा हालनुमा कमरा मधु की सुरुचि को प्रकट कर रहा था .एक शेल्फ में किताबें तो दूसरे में डी वी डी दीवार पर एक बड़ी सी सीनरी जिसमे सूखे पेड़ों के पीछे डूबता सूरज दिख रहा था. मुझे उस शाम की याद आ गयी . डाइनिंग टेबल के अगल बगल दो दरवाजे एक शायद किचन में और दूसरा बेडरूम में खुलता होगा .

तभी दरवाज़ा खुला तो मधु ने आँख खोली .माला और पुष्पा थीं .

मम्मी कैसी है अब?माला ने धीरे से पूंछा .

तब तक पुष्पा अंदर कमरे में झांक आयी .माला ने मधु को मीठा सा उलाहना दिया ,थक गयी न ?कहा था हम रुक जाते है पर नहीं खुद को बड़ा जवान समझती है न सब अकेले कर लेगी.

मधु के चेहरे पर मुस्कान आ गयी .अरे में आज भी तुम सबसे ज्यादा जवान हूँ और सब हंस दिए.

पुष्पा यार काफी पिला दे देख दूध पड़ोस में होगा ले आ .

काफी पीते हुए हलकी फुलकी बातें होती रही फिर में घर आ गया। क्रमश

(आज ब्लॉग जगत में २ वर्ष पूरे हो गए कैसा रहा ये सफ़र इस बारे में बहुत कुछ कहना है लेकिन इस कहानी का सिलसिला न टूटे इसलिए वो फिर कभी. )

Wednesday, May 4, 2011

इंतजार ....७

(मधु और मधुसुदन मंदिर में अचानक मिले देखते ही बरसों पुरानी बातें ताज़ा हो गयी. थोड़ी देर साथ बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानकारी ली एक दूसरे का पता फोन नंबर लिया .मधु के जाने के बाद में वही बैठ कर पुरानी यादों में खो गया .पता नहीं कैसे पर घर में मधु के बारे में पता चल गया घर पहुंचते ही माँ पिताजी और दादी के सवालात शुरू हो गए.जब मधु के बारे में बताया तो घर में बवाल मच गया. माँ ने अनशन की धमकी दे दी. उस दिन मधु से नहीं मिला जब घर पहुंचा माँ को अस्पताल ले जाते देखा.अनशन से माँ की हालत ख़राब हो गयी थी.उन्हें वचन दिया की कोई ऐसा कम नहीं करूंगा जिससे कुसुम की शादी में कोई रूकावट आये .फिर ऑफिस के काम से दिल्ली चला गया.जब लौट कर आया...)अब आगे

घर आ कर एक सिगरेट सुलगाई और बाहर बालकनी में आ गया.
दिल्ली में चार -पांच दिन रहा पर कुछ भी तो नहीं सोच सका .न ही किसी निर्णय पर पहुँच सका .मधु से मिलूंगा तो क्या कहूँगा कैसे सब बताऊंगा इस बारे में सोचने से बचता रहा

वापस घर पहुंचा तो किन्ही मेहमानों को बैठक में पिताजी के साथ बैठे देखा. मुझे देख कर पिताजी ने बड़े गर्व से कहा ये आ गया मेरा बेटा.
आओ बेटा सफ़र कैसा रहा जैसी कुछ औपचारिक बातें कर के में अंदर आ गया.
भाभी से पूछना चाहा की ये लोग कौन है ?पर वो काम बहुत है भैया अभी बताते है कह कर चली गयी.
सफ़र की थकान मेरी आँख लग गयी.

भैया उठो चाय पी लो छुटकी की आवाज़ पर मेरी नींद खुली .भैया जल्दी से चाय पी कर तैयार हो जाइये पिताजी बुला रहे है.उन्हें आपको लेकर कही जाना है.
पर कहाँ ?भैया कहाँ हैं?वो चले जाएँ ना .मैंने अलसाते हुए कहा .
भैया भी तैयार बैठे है बस आपका इंतजार कर रहे है.
तैयार हो कर नीचे पहुंचा तो देखा दो रिक्शे खड़े है. पिताजी ने भैया को माँ के साथ बैठने को कहा ओर खुद मेरे साथ रिक्शे में बैठ गए.
बुरे फंसे मैंने मन में सोचा .अब माँ के साथ होता तो कुछ पूछता भी ,हम कहाँ जा रहे है? पर पिताजी से कुछ पूछना उनका उस दिन का गुस्सा याद था मुझे सो चुप ही रहा.
अगले एक -डेढ़ घंटे के घटनाक्रम में में मूक दर्शक ही बना रहा. चाय की ट्रे ले कर आयी एक लड़की ,आस-पास की बातें परदे के पीछे से झांकती आँखें फुसफुसाहटे ओर हंसी की आवाजें .
जब माँ ने पूछा तुझे लड़की पसंद है तो कसमसा कर रह गया में . सिर्फ यही कह पाया -माँ S S
माँ ने आँखों में अनुनय की .
माँ थोडा समय तो दो मैंने विनती भरे स्वर में कहा.
बेटा तेरे पिताजी. ..
माथे पर टीका हाथ में श्रीफल और कंधे पर शाल डाले घर तक पहुँचने तक क्या क्या हुआ याद नहीं.
आज भी मधु से नहीं मिल पाया वह मेरा इंतजार कर रही होगी. मैंने जो चार पांच दिन की मियाद ली थी वह पूरी हो गयी थी. आज तो उसे खबर भी नहीं भिजवाई थी .न जाने वह अकेले कब तक मेरा इंतजार करती रही होगी.
घर पहुँचते ही पिताजी ने ऐलान कर दिया -अब अपने लाडले से कह दो उस लड़की से न मिले .रूपया नारियल हो चुका है .अब ऐसी कोई बात लड़की वालों तक पहुंचेगी तो रिश्ता भी बिगड़ सकता है ओर खानदान की बदनामी भी होगी.
ठंडी हवा से एक सिरहन सी हुई,में बालकनी से अंदर आ गया.
अंदर बस यूं ही आईने के सामने खड़ा हो गया .यूं लगा जैसे खुद को नहीं किसी ओर को देख रहा हूँ. कौन है वह?असली मदुसुदन पर असली मदुसुदन कौन है? वह जो आईने में दिख रहा है या जो आईने के सामने खड़ा है.
आज मधु से मुलाकात,ओर बीती बातों का यूं याद आ जाना आज खुद के असली स्वरुप को देख रहा हूँ कायर ,डरपोक बेवफा मदुसुदन .
क्यों उस दिन बिना कुछ बोले पूछे में सबके साथ चला गया ?क्यों लौट कर मैंने विरोध नहीं किया मधु से शादी करने में सबसे बड़ी परेशानी कुसुम की शादी में ही आती न ,तो कुसुम की शादी होने तक में शादी न करता.
उस दिन हुए ड्रामे से घबरा गया था में या माँ की हालत देख कर,पिताजी के गुस्से से या..मैंने सर को झटक कर उन विचारों से बाहर आना चाहा.पर आईने में कोई ठहाका मार कर हंस दिया.
क्या तुम सच में मधु से प्यार करते थे ?प्यार तो उसने किया तुमसे अकेली है वह आज भी .तुम तो अपनी दुनिया में खो गए शादी बच्चे सब सुख उसे क्या मिला?
नज़रें नहीं मिला पाया में खुद से . आईने के सामने से हट गया . क्रमश

प्यार के दो बोल

 म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...