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प्यार के दो बोल
म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...
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बात तो बचपन की ही है पर बचपन की उस दीवानगी की भी जिस की याद आते ही मुस्कान आ जाती है। ये तो याद नहीं उस ज़माने में फिल्मों का शौक कैसे और ...
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कल दो खबरे सुनी और पढ़ीं उनसे मन विचलित हो गया . एक घटना हमारे घर के पास ही हुई ,किसी के नए मकान का गृहप्रवेश था मेहमान खाना खा रहे थे त...
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जिंदगी के हर कदम हर पड़ाव हर मोड़ पर ,घटनाओं को अलग अलग कोण से देखते हुए बहुत कुछ सीखा जा सकता है.सच तो यही है की हर घटना कुछ सिखाने के लिए ...

सभी को बधाई एवम शुभकामनाऐं ।
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई
ReplyDeleteकविता तुम्हारा इंतज़ार खत्म हुआ ...सुखद परिणाम अब तुम्हारे हाथो में है
ReplyDeleteबहुत-बहुत बधाईयाँ...
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