खता जो तुमने की,
सजा क्यूँ हमको दी...
चुप से सह लेते हम सजा भी।
फिर क्यूं तुमने शिकायत की ,
सह लेंगे सभी शिकवे भी
पर जो सजा तुमने खुद को दी
सह न सकेंगे ........
Wednesday, February 2, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
प्यार के दो बोल
म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...
-
खरगोन इंदौर के रास्ते में कुछ न कुछ ऐसा दिखता या होता ही है जो कभी मजेदार विचारणीय तो कभी हास्यापद होता है लेकिन एक ही ट्रिप में तीन चार ऐ...
-
बात सन 80 की है। पापाजी का झाबुआ जिले के राणापुर से इंदौर ट्रांसफर हुआ था। इंदौर में खुद का मकान था जिसमें कभी रहे नहीं थे। हम तो बहुत छोटे...
-
रोज़ की तरह चंपा ने उठकर खाना बनाया ओर डब्बा साइकल पर टांग दिया नौ बजे उसे काम पर पहुंचना था .माथे पर चमकीली बिंदी ,आँखों में काजल,तेल लगा क...
सह लेंगे सभी शिकवे भी
ReplyDeleteपर जो सजा तुमने खुद को दी
सह न सकेंगे ........
प्रेम की इन्तहा...बहुत सुन्दर अहसास और उनकी अभिव्यक्ति ...
हा हा हा इसे प्यार कहते हैं. प्यार यानि अपनों की खुशी,अपनों के लिए जीना फिर....वो दुखी हो कैसे सहन हो सकता है भला?
ReplyDeleteयही तो है न् इस कविता में?
मेरे लिए प्यार ईश्वर है इसीलिए इस शब्द का ज़िक्र भर मुझे डूबा देता है किसी रचना में और.....मैं डूब गई इन चार पंक्तियों में.
प्यार
इंदु