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प्यार के दो बोल
म.प्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कथा क्रमशः आयोजन में देवास जाना हुआ। आग्रह था इसलिए मैं वहीं रुक गई। रात में रुकने का इंतजाम एक ह...
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बात तो बचपन की ही है पर बचपन की उस दीवानगी की भी जिस की याद आते ही मुस्कान आ जाती है। ये तो याद नहीं उस ज़माने में फिल्मों का शौक कैसे और ...
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जिंदगी के हर कदम हर पड़ाव हर मोड़ पर ,घटनाओं को अलग अलग कोण से देखते हुए बहुत कुछ सीखा जा सकता है.सच तो यही है की हर घटना कुछ सिखाने के लिए ...
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#बाल_बाल_बचे #गुस्से_के_गुड_इफेक्ट मोबाइल हाथ में ही था जब एक मैसेज आया कि अकाउंट में तीन सौ रुपये आये हैं। एक बार देखा फिर सोचा आये हों...
कविता जी आप तो चिट्ठियों पर मेहरबान हैं. आपके ब्लॉग पर चिट्ठी से जुडी यादें रोज ताजा हो रही हैं. आपकी चिट्ठियों में रिश्तों की सोंधी खुशबू है, जो भीना-भीना अहसास दे जाती है. अब आपकी चिट्ठियाँ डाकिया बाबू नहीं बांचे तो भला कौन बांचेगा. तो आप भी अपनी इन सभी चिट्ठियों को "डाकिया डाक लाया" ब्लॉग पर देखें और चिट्ठियाँ लिखती रहें, ताकि हम उन्हें पहुंचाते रहें.
ReplyDeletethank you dakiya baabu jis tarah sabhi ka response in chiththiyon ke liye mila hai mujhe lagata hai mera likhana sarthak raha.
ReplyDeleteबधाई
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