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क्या सच में है समानता

क्या सच में है समानता


पिछले चार पाँच दिन से लगभग रोज़ ही महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में जाना हो रहा है।  किसी होटल के ए सी हॉल में बढ़िया चाय नाश्ते के साथ सशक्त महिलाएं महिला सशक्तिकरण की बातें कर रही हैं।  हालाँकि कुछ वक्ताओं ने कुछ नए विचार भी दिए जिनसे निश्चित ही नया नजरिया विकसित हुआ। हर कार्यक्रम के साथ एक कसक भी रही कि ऐसे विचार उन महिलाओं तक पहुँचना चाहिए जो अभी भी आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पाई हैं वे इनसे प्रेरणा ले सकती हैं।  

आज बेटी से बात हुई उसने बताया उसकी कंपनी में सभी महिला कर्मचारियों (अधिकांश लड़कियाँ हैं ) की एक मीटिंग बुलाई गई थी और उनसे अपने साथ होने वाले व्यवहार के बारे में बोलने को कहा गया। प्रोग्राम का थीम था pledge for  parity समानता की शपथ।  अधिकांश लड़कियों ने अपने परिवार में उन्हें मिले सहयोग और समानता की बात कही कुछ ने अपने संघर्ष की बात भी बताई पर कंपनी में होने वाले भेदभाव की बात किसी ने नहीं की।  जब मेरी बेटी के बोलने की बारी आई तब उसने कुछ यूँ कहा।  
* सर अभी सभी ने घर में मिले सपोर्ट समानता की बात कही लेकिन कंपनी में होने वाले भेदभाव…