Posts

Showing posts from February, 2016

तेरे मेरे बीच में

पिछले कुछ दिनों में महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश को लेकर फिर बवाल मचा। रूढ़िवादी इसे धर्म और धार्मिक आस्था पर प्रहार मान रहे है तो प्रगतिशील इसे बदलाव का शुभ संकेत। इस बहस से एक बार फिर स्त्री पुरुष समानता की चर्चा जोरों पर है वहीँ स्त्रियों के अधिकारों की पुनः पड़ताल की जा रही है।  एक मौका था केरल के सबरीमला तीर्थ में महिलाओं के मासिक में होने का पता लगाने वाली मशीन लगाने का फैसला या शिंगणापुर में एक महिला भक्त का शनि चबूतरे पर चढ़ तेल चढाने की घटना।  इसके बाद तो पूरे देश में मानों हड़कंप ही मच गया और महिला संगठनों सहित समाज के विभिन्न वर्गों में इस प्रतिबन्ध के अौचित्य और सही गलत को लेकर एक बहस शुरू हो गई। 
समानता की अवधारणा में असमानता  वैसे तो सबरीमला ऐसा मंदिर है जहाँ हर जाति धर्म और आस्था के लोग प्रवेश कर सकते है।  ब्राह्मण और दलित बिना किसी भेदभाव के दर्शन कर सकते हैं पर इस मंदिर में बारह से पचास वर्ष की उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है यानि जीवन का वह काल जब स्त्री एक प्राकृतिक चक्र के द्वारा मासिक धर्म से होती है। कहीं कोई महिला या बच्ची जो इस उम्र से पहले या बाद में इ…