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छू लिया आसमान

बचपन से वह उस पहाड़ी को देखती आ रही थी। उबड़ खाबड़ रास्ते फैले झाड़ झंखाड़ और फिसलन के बीच से उसकी चोटी पर वह बड़ा सा पत्थर सिर उठाये खड़ा था। मानों चुनौती दे रहा हो दुनिया को है हिम्मत इन दुर्गम रास्तों को पार कर मुझ तक पहुँचने की ?आसमान को छू लेने की ? उसने भी हमेशा सपना देखा था एक दिन वह वहाँ तक जरूर पहुँचेगी लेकिन इतना आसान तो ना था।  रास्ते के छोटे पत्थरों से रोड़े तो उसकी पढाई में भी आये।लोगों की कंटीली बातें ताने सुन कर उनसे अपने आत्मविश्वास को लहूलुहान होने से बचाते उसने नौकरी शुरू की। पुरुष मानसिकता की कीचड भरी फिसलन में खुद को संभालते संभालते आज जब उसका प्रमोशन ऑर्डर हाथ आया उसका मन चोटी की उस बड़ी चट्टान पर उछल कर मानों आसमान को छू रहा था।   कविता वर्मा 

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शांति प्रिय और सुरक्षित माने जाने वाले शहर इंदौर में पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएँ घटीं वे इस शहर की छवि से कतई मेल नहीं खातीं। जिस तरह शहर में गुंडा गर्दी बढ़ रही है शराब और ड्रग्स के नशे में सरे राह लोगो पर कातिलाना हमले हो रहे हैं वह शहर की फ़िज़ा में चिंता घोलने के लिए काफी थे ही उस पर एक और खबर ने लोगों को ना सिर्फ चौंका दिया बल्कि हर लड़की के माता पिता को चिंता में डाल दिया। गुंडों के डर से एक परिवार को अपनी बेटियों को शहर में ही हॉस्टल में भेजना पड़ा। जब वे अपने माता पिता से मिलने आईं तो वे गुंडे फिर उनके घर में आ धमके और लड़कियों से छेड़ खानी शुरू कर दी और उन के माँ बाप पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। शहर में गुंडा विरोधी अभियान के तहत पुलिस की कार्यवाही को कई न्यूज़ चैनल्स ने सनसनी खबर के तौर पर दिखाया जिसमें गुंडों की सरे आम पिटाई की गई उनका जुलुस निकाला गया। पुलिस के इस कदम पर सवालिया निशान लगाये गए की क्या उसे ऐसे अधिकार हैं ?क्या मानव अधिकारों का उलंघन नहीं है ?मुख्यमंत्री का ये बयान की पुलिस कार्यवाही में कोई राजनैतिक हस्तक्षेप नहीं होगा ने हंगामा ही बरपा दिया। विरोधियों ने तो …