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Showing posts from June, 2013

रजिस्ट्रेशन या लूट ???

बारहवीं की पढाई के साथ  हो जाती है जद्दोजहद आगे की पढ़ाई की .आज के समय में कई प्रोफेशनल कोर्स हैं जिनमे बच्चे अपनी रूचि अनुसार जा सकते हैं इनमे कई जाने माने  कोर्स जैसे इंजिनीअरिंग ,मेडिकल, सी ए ,सी एस ,एम् बी ए, के बारे में जानकारी हर कहीं उपलब्ध है लेकिन फिर भी कई कोर्स ऐसे हैं जिनके बारे में जानकारी तो फिर भी जुटाई  जा सकती है लेकिन उसके लिए अलग अलग राज्यों में कोई तालमेल नहीं है .
आर्किटेक्चर कॉलेज में एडमिशन के लिए आई आई टी की में एग्जाम के साथ ही सेकंड पेपर होता है जिसकी मेरिट लिस्ट बारहवीं के मार्क्स के साथ बनती है .देश में सिर्फ दो आई आई टी हैं जिनमे आर्किटेक्चर के कोर्स हैं रुड़की और खड़गपुर जिनमे अस्सी अस्सी सीट्स हैं .आई आई टी का पहला पेपर पंद्रह अप्रेल को हुआ था और बारहवीं का रिजल्ट चौबीस मई को आ गया इसके बावजूद भी अब तक आई आई टी का रिजल्ट घोषित नहीं हुआ .इसलिए बच्चे राज्य के कॉलेज में रजिस्ट्रेशन करवाने को विवश हैं . 
इसी रिज़ल्ट पर नॅशनल कॉलेज में एडमिशन मिलेंगे .सिर्फ सात नॅशनल कॉलेज में आर्किटेक्चर का कोर्से है हमीरपुर ( हिमाचल प्रदेश ) ,जयपुर ( राजस्थान ), पटना ( बिहा…

केदारनाथ आपदा ..सूक्ष्म कारण भी है प्रभावी

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केदारनाथ आपदा ..सूक्ष्म कारण भी है प्रभावी
केदारनाथ में आयी विपदा ने भारतीय जन मानस को हिला  दिया .अभी सही आंकड़ा प्राप्त नहीं हुआ है लेकिन हज़ारों लोग लापता है और सेंकडों मृत .अलग अलग राज्य सरकारे अपने यात्रियों की सुरक्षा के लिए मदद भेज रही हैं केंद्र ने भी त्वरित मदद दी है सेना के जवान जान पर खेल कर लोगों की मदद कर रहे हैं .जिन लोगों को मदद मिल चुकी है और जो सुरक्षित हैं वे सरकार और व्यवस्था को कोस रहे हैं .मीडिया ने अपनी कमर कस कर जवानों को तैनात कर दिया है जो लोगों के आक्रोश को आम लोगों तक पहुँचाये जिसके कोई सार्थक परिणाम नहीं आने वाले हैं . 
एक बात बार बार कही जा रही है कि मौसम विभाग ने दो दिन पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दे दी थी मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल फटने की कोई चेतावनी नहीं दी गयी थी ये अचानक आयी विपदा है जो तीन साल पहले लेह में आयी थी और अब उत्तराखंड में . बादल फटने जैसे हालात बने कैसे ?पहले इस तरह की विपदा यदा कदा आती थीं अब इनकी आवृति अचानक कैसे बढ़ गयी ? इसके पीछे कुछ सूक्ष्म कारण हैं जिन पर गौर किया जाना जरूरी है .  हमारे कई धार्मिक स्थल सुदूर पहाड़ों पर…

उत्तराखंड यात्रा ..एक याद

(केदारनाथ की ताज़ा तस्वीरें देख कर मन द्रवित हो गया .मंदिर के आस पास बने मकान उन पंडों पुजारियों के है जो पीढ़ियों से कुटुंब विशेष के पुरोहित हैं उनके पास कई पीढ़ियों के यजमानों का लेखा जोखा  है बिना किसी कम्पूटर के चंद  मिनिटों में आपके कुटुंब का पुरोहित आप के पास पहुँच कर अपनी बही में केदारनाथ आये आपके पूर्वजों के नाम,स्थान गोत्र सब बता देते हैं .
इस तबाही में कई ( या सभी ) कुटुम्बों के पीढ़ियों के ये रिकॉर्ड भी नष्ट हो गए होंगे ,लगभग हर भारतीय की विरासत है ये . )
लगभग पच्चीस साल पहले की बात है उत्तराखंड के चारों  धाम यमुनोत्री गंगोत्री केदारनाथ बद्रीनाथ जाने का प्रोग्राम बना . लम्बा सफ़र पंजाब की गर्मी ,आतंकवाद का डर सब पार करके हरिद्वार पहुंचे .मई के महीने में भी गंगा के बर्फ जैसे ठन्डे पानी में स्नान करके मन आध्यात्मिक आस्था से भर गया . शाम के समय घाट पर गंगा जी की आरती धर पर तैरते दीपक जैसे आँखों में स्थायी रूप से बस गये .  ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला पार करते मन जहाँ रोमांचित था वहीं थोडा डरा हुआ भी . 
मैदानी इलाका पार करके जब यमुनोत्री जाने के लिए सफर शुरू हुआ जानकी चट्टी पहुँचते हम लो…