Followers

Friday, December 14, 2012

क्षणिकाएं


आज एक सहेली के आग्रह पर स्कूल के नाटक के लिए कुछ लाइन लिखी थी।।


लड़कियों की शिक्षा 

बेटियां भी है आपकी बगिया की फुलवार 
उन्हें भी है पनपने का पूरा अधिकार। 
उचित देखभाल,भोजन और पढाई 
लड़कियों की उन्नति से ही 
दोनों घरों में खुशहाली है छाई।। 

भ्रूण हत्या 

बाबा मैं भी हूँ तुम्हारा ही अंश 
मानों तो चलाऊँगी तुम्हारा ही वंश। 
करुँगी जग में रोशन नाम तुम्हारा 
न रोको  इस दुनिया में आने से 
पाने दो मुझे भी प्यार तुम्हारा।।


दहेज़ 

ना तौलो मान मेरा सोने-चांदी से 
बड़ी आस से आयी हूँ अपना नैहर छोड़ के। 
अपना लो मुझे अपनी बेटी समझ के
पा जाऊं तुममे मेरे माँ-बाबा प्यारे से। 
बन जाये फिर इक संसार प्यारा प्यारा 
जो हो कीमती हर इक दहेज़ से। 

बाल विवाह 

बचपन के झूले, गुड़ियों के खेल, 
अम्मा की गोदी, सखियों का मेल, 
भाई का प्यार, बाबा  का दुलार, 
सुख की नींद, भोला संसार, 
न छीनो मुझसे करके बचपन में ब्याह 
अम्मा ये है मेरी छोटी सी चाह।। 

Thursday, December 13, 2012

पर्यावरण पर मेरी एक पोस्ट यहाँ भी ...
http://www.parikalpnaa.com/2012/12/3_11.html

http://alpanadeshpande.blogspot.in/2011/04/blog-post_15.html

Saturday, December 8, 2012

गर्भनाल पत्रिका के दिसंबर 2012..73अंक में मेरा आलेख पेज नंबर 16

http://www.garbhanal.com/Garbhanal%2073.pdf




हिन्दी में लिखिए

image

चेतावनी

"कासे कहूँ?"ब्लॉग के सारे लेखों पर अधिकार सुरक्षित हैं इस ब्लॉग की सामग्री को किसी भी अन्य ब्लॉग, समाचार पत्र, वेबसाईट पर प्रकाशित एवं प्रचारित करते वक्त लेखक का नाम एवं लिंक देना जरुरी हैं।

image

ब्लॉग4वार्ता पर आएं

ब्लॉग4वार्ता हिन्दी चिट्ठों का अनवरत प्रकाशित एक मात्र संकलक है। जहाँ आपको एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों के उम्दा एवं बेहतरीन चिट्ठे पढने को मिलेगें। आपका हार्दिक स्वागत है।